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Shree Kuber Chalisa : कुबेर चालीसा पाठ

99Pandit Ji
Last Updated:November 29, 2023

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कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का पाठ धन के देवता भगवान कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का पाठ स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करके करने से भक्त को धन से संबंधित सभी समस्याओं से राहत मिलती है तथा सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ के साथ – साथ ही यदि आप लक्ष्मी जी की आरती का जाप करने माता लक्ष्मी भी उनसे प्रसन्न होती है व उनके घर में धन की वर्षा भी करती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ एक धार्मिक भक्ति भजन है जो भगवान कुबेर को समर्पित किया गया है|

कुबेर चालीसा

इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] पाठ का जाप धन को आकर्षित करने तथा वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए भी किया जाता है| ऐसा माना जाता है कि इस कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का जाप करने से भगवान कुबेर प्रसन्न होते है तथा इसके बदले वह अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करते है| जिससे भक्तों को धन संबंधी सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है| कुबेर चालीसा [Kuber Chalisa] का नियमित रूप से जाप करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है|

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कुबेर चालीसा पाठ | Shree Kuber Chalisa Lyrics In Hindi

|| कुबेर चालीसा ||

|| दोहा ||

जैसे अटल हिमालय,
और जैसे अडिग सुमेर ।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे,
अविचल खडे कुबेर ॥

विघ्न हरण मंगल करण,
सुनो शरणागत की टेर ।
भक्त हेतु वितरण करो,
धन माया के ढेर ॥

|| चौपाई ||

जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।
धन माया के तुम अधिकारी ॥

तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।
पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥

स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।
सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥

यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।
सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥

महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।
युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥

सदा विजयी कभी ना हारैं ।
भगत जनों के संकट टारैं ॥

प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।
पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥

विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।
विभीषण भगत आपके भ्राता ॥

शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।
घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥

शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।
अमृत पान करी अमर हुई काया ॥

धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।
देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥

पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।
बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥

स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।
त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥

शंख मृदंग नगारे बाजैं ।
गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥

चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।
ऋद्धि-सिद्धि नित भोग लगावैं ॥

दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।
यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥

ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।
देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥

पुरुषों में जैसे भीम बली हैं ।
यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥

भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।
पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥

नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।
वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥

कांधे धनुष हाथ में भाला ।
गले फूलों की पहनी माला ॥

स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।
दूर-दूर तक होए उजाला ॥

कुबेर देव को जो मन में धारे ।
सदा विजय हो कभी न हारे ॥

बिगड़े काम बन जाएं सारे ।
अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥

कुबेर गरीब को आप उभारैं ।
कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥

कुबेर भगत के संकट टारैं ।
कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥

शीघ्र धनी जो होना चाहे ।
क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥

यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।
दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥

भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।
अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥

रोग शोक को कुबेर नशावैं ।
कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥

कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।
कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥

कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।
कुबेर भूले को राह बता दे ॥

प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।
भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥

रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।
दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥

बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।
कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥

कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।
चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥

कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।
जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥

चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।
मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥

पाठ करे जो नित मन लाई ।
उसकी कला हो सदा सवाई ॥

जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।
उसका जीवन चले सुखदाई ॥

जो कुबेर का पाठ करावै ।
उसका बेड़ा पार लगावै ॥

उजड़े घर को पुन: बसावै ।
शत्रु को भी मित्र बनावै ॥

सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।
सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥

प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।
मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥

॥ दोहा ॥

शिव भक्तों में अग्रणी,
श्री यक्षराज कुबेर ।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,
कर दो दूर अंधेर ॥

कर दो दूर अंधेर अब,
जरा करो ना देर ।
शरण पड़ा हूं आपकी,
दया की दृष्टि फेर ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

कुबेर चालीसा

Shree Kuber Chalisa Lyrics In English | जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी

|| Kuber Chalisa ||

|| Doha ||

Jaise Atal Himalaya,
Aur jaise Adig Sumer.
Aise hi Swarg Dwar pe,
Avichal khade Kuber.

Vighn haran mangal karan,
Suno sharnagat ki ter.
Bhakt hetu vitran karo,
Dhan maya ke dher.

|| Chaupai ||

Jai Jai Jai Shri Kuber Bhandari.
Dhan maya ke tum adhikari.

Tap tej punj nirbhay bhay hari.
Pavan veg sam sam tanu baladhari.

Swarg dwar ki karen pehre dari.
Sevak Indra Dev ke aagyakari.

Yaksha yakshini ki hai sena bhari.
Senapati bane yuddh mein dhanudhari.

Maha yoddha ban shastra dharein.
Yuddh karein shatru ko maarein.

Sada vijayi kabhi na haarein.
Bhagat jano ke sankat tarein.

Prapitamah hain swayam vidhata.
Pulista vansh ke janm vikhyata.

Vishrava pita Idvija ji mata.
Vibhishan bhagat aapke bhrata.

Shiv charano mein jab dhyan lagaya.
Ghor tapasya kari tan ko sukhaya.

Shiv vardan mile devtya paya.
Amrit paan kari amar hui kaya.

Dharm dhvaja sada liye haath mein.
Devi devta sab firai saath mein.

Pitambar vastra pahne gat mein.
Bal shakti puri yaksh jaat mein.

Swarn sinhasan aap virajein.
Trishul gada hath mein saajein.

Shankh mridang nagare bajayein.
Gandharv raag madhur swar gaayein.

Chausath yogini mangal gaavein.
Riddhi-siddhi nit bhog lagavein.

Daas daasani sir chatra phiraavein.
Yaksh yakshani mil chavar dhulaavein.

Rishiyo mein jaise Parashuram bali hain.
Devan hain jaise Hanuman bali hain.

Purusho mein jaise Bhima bali hain.
Yaksho mein aise hi Kubera bali hain.

Bhagato mein jaise Prahlad bade hain.
Pakshiyon mein jaise Garud bade hain.

Nago mein jaise Shesh bade hain.
Vaise hi bhagat Kubera bade hain.

Kandhe dhanush hath mein bhala.
Gale phoolon ki pahni mala.

Swarn mukut aru deh vishaala.
Door-door tak hoye ujala.

Kubera dev ko jo man mein dhare.
Sada vijay ho kabhi na haare.

Bigde kaam ban jaayein saare.
Ann dhan ke rahein bhare bhandare.

Kubera gareeb ko aap ubhara.
Kubera karj ko shighra utara.

Kubera bhagat ke sankat tara.
Kubera shatru ko kshan mein maare.

Shighra dhani jo hona chahe.
Kyun nahi Yaksh Kubera manaye.

Yah paath jo padhe padhaaye.
Din dugna vyaapar badhaaye.

Bhoot pret ko Kubera bhagaave.
Ade kaam ko Kubera banaave.

Rog shok ko Kubera nashaave.
Kalank kodh ko Kubera hataave.

Kubera chadhe ko aur chadhade.
Kubera gire ko pun: utha de.

Kubera bhagy ko turant jaga de.
Kubera bhule ko raah bata de.

Pyaase ki pyaas Kubera bujha de.
Bhookhe ki bhook Kubera mita de.

Rogi ka rog Kubera ghata de.
Dukhiya ka dukh Kubera chhuta de.

Baanh ki god Kubera bhara de.
Kaarobar ko Kubera Badha de.

Kaaraagaar se Kubera chhuda de.
Chor thagon se Kubera bacha de.

Court case mein Kubera jitavae.
Jo Kubera ko man mein dhyaavae.

Chunav mein jeet Kubera karaae.
Mantri pad par Kubera bithaave.

Paath kare jo nit man laai.
Uski kala ho sada savaai.

Jispe prasann Kubera ki maai.
Uska jeevan chale sukhdaai.

Jo Kubera ka paath karaave.
Uska beda paar lagaave.

Ujade ghar ko pun: basaave.
Shatru ko bhi mitr banaave.

Sahasr pustak jo daan karaai.
Sab sukh bhog padaarth paai.

Pran tyag kar swarg mein jaai.
Manas parivaar Kubera keerti gaai.

|| Doha ||

Shiv bhakton mein agrani,
Shri Yaksharaj Kuber.
Hriday mein gyan prakash bhar,
Kar do door andher.

Kar do door andher ab,
Jara karo na der.
Sharan pada hoon aapki,
Daya ki drishti pher.

Nitt nem kar pratah hi, paath karoun chalisa.
Tum meri manokamana, purn karo Jagadish.

Magsar Chhathi Hemant Rutu, Samvat Chausath Jaan.
Astuti chaalisa Shivahi, poorn kiye kalyan

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