Hindu God and GoddessWho is Kuber God? The Secret Vedic Science of Eternal Wealth
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calendar_today Jun 19, 2026
वरलक्ष्मी व्रतं 2026: भारत देश में अनेको देवी – देवताओं की पूजा की जाती है| सभी लोग अलग – अलग देवी – देवताओं को मानते है और उन्हें अपना इष्ट मानकर उनकी आराधना करते है| जैसा कि आप को पता है हिन्दू धर्म में हर माह ही कोई ना कोई सा त्यौहार आता ही रहता है|
आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वरलक्ष्मी व्रतं 2026 के बारे में सारी आपको देंगे जैसे कि इसका शुभ मुहूर्त क्या होगा और पूजा की विधि क्या होगी| वरलक्ष्मी व्रतं 2026 को वरलक्ष्मी व वरलक्ष्मी नोम्बू के नाम से भी जाना जाता है|

यह त्यौहार हिन्दू धर्म में काफी महत्वपूर्ण है| हिन्दू धर्म की सभी विवाहित महिलाएं इस दिन वरलक्ष्मी व्रत करती है और माँ वरलक्ष्मी की पूजा की जाती है|
वरलक्ष्मी में वर का अर्थ वरदान देने वाली से है| इसी वजह से वरलक्ष्मी व्रतं 2026 का हिन्दुओं में अलग महत्व में है| इस बार वरलक्ष्मी व्रतं 2026 का त्यौहार 21 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा|
मान्यता है कि यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को किया जाता है| इस व्रत को करने से भक्तों की दरिद्रता दूर होती है और उन पर माता रानी की कृपा होती है|
इस वरलक्ष्मी के व्रत को अधिकतर दक्षिणी भारत के लोग मानते है| इस दिन पुरे भारत देश में सभी जगहों पर विवाहित महिलाएं इस व्रत को करती है|
इस व्रत को करके वह माता वरलक्ष्मी से अपने पति, अपने बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा करने के लिए प्रार्थना करती है और पूरे दिन उपवास रखकर माता वरलक्ष्मी की पूजा करती है| इस व्रत को करने से भक्त के जीवन से सभी प्रकार की धन, चिंता संबंधित परेशानियां समाप्त हो जाती है|
इस वर्ष वरलक्ष्मी व्रतं 2026 की तिथि 21 अगस्त 2026 की है।
यह वरलक्ष्मी व्रत 2026 के लिए सबसे शुभ मुहूर्त है| आपको यही सलाह दी जाती है कि आप इन्ही में से किसी भी मुहूर्त में पूजा को संपन्न कर सकते है|
भारत हर त्यौहार से संबंधित आस्थाओं और मान्यताओं को अपने में समेट कर रखता है| यहाँ हर दिन किसी न किसी देवी – देवताओं के त्यौहार या उनसे सम्बंधित व्रत आते ही रहते है|
हमारे देश को तीज – त्यौहार व व्रत उपासना आदि के लिए जाना जाता है| यहाँ सप्ताह के सातों दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित है|
यह वो व्रत है जो हर सप्ताह की तिथि अनुसार आते है| इनके अलावा कुछ ऐसे भी व्रत जो सप्ताह के अनुसार नहीं आते है| इनका एक निश्चित दिन होता है| जैसे कि कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भाद्र माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है|
उसी प्रकार ही यह वरलक्ष्मी या वरलक्ष्मी नोम्बू का व्रत वर्ष में एक ही बार सावन माह के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है|
आज के समय में सभी को एक सुख – समृद्धि के परिपूर्ण जीवन चाहिए| माता रानी का यह व्रत आपको अपने जीवन में सभी कठिनाइयों से मुक्त कर देगा और आपको जीवन में सुख – समृद्धि प्रदान करेगा|
इस दिन माँ वरलक्ष्मी का उपवास करने से, जो माँ लक्ष्मी का ही एक रूप है, कभी भी भक्तों के जीवन में धन – धान्य से सम्बंधित किसी भी प्रकार भी समस्या नहीं आती है|
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पुरुष,महिला का भाग्य उनका स्वयं का ही होता है| जैसा कि आप देखते ही होंगे कि पुरुष धन कमाने के लिए बहुत मेहनत करता है|
वही महिलाएं भी अपने पति के लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है| वरलक्ष्मी ही एक ऐसा व्रत है जिसे पति और पत्नी दोनों साथ में ही रखते है|
इसके व्रत के प्रभाव से घर – परिवार में सुख – समृद्धि बनी रहती है और महिलाओं को संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिलता है|
जब भी हम किसी भी देवी – देवताओं की पूजा करते है या किसी के द्वारा पूजा करवाते है तो पूजा के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होती है| आज हम उन्ही सामग्री के बारे में जानेंगे|

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निस दिन सेवत हर – विष्णु – विधाता || ॐ जय …..
उमा , रमा ,ब्रह्माणी, तुम ही जग माता |
सूर्य – चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता || ॐ जय ….
तुम पाताल – निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता |
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि – सिद्धि – धन पाता || ॐ जय….
तुम पाताल – निवासिनि, तुम ही शुभदाता |
कर्म – प्रभाव – प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता || ॐ जय….
जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता |
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता || ॐ जय….
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता |
खान – पान का वैभव सब तुमसे आता || ॐ जय….
शुभ – गुण मंदिर सुंदर, क्षीर निधि जाता |
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता || ॐ जय….
महालक्ष्मीजी जी की आरती, जो कोई नर गाता |
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता || ॐ जय……
या श्री: स्वयं सुकृतिना भवनेश्वलक्ष्मी: |
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि : ||
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा |
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम ||
इस व्रत से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी के बारे में आज हम आपको इस आर्टिकल माध्यम से बताएँगे| इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार मगध राज्य में एक कुंडी नाम का गाँव हुआ करता था|
इस गाव में एक महिला रहती थी| उसका नाम चारुमती था| जिसे माता लक्ष्मी में बहुत अटूट विश्वास था| वह हर दिन माता लक्ष्मी का पूजन करती थी|
उसकी निस्वार्थ भक्ति से माँ लक्ष्मी उनसे प्रसन्न हो गयी| एक दिन माता लक्ष्मी चारुमती के सपने में आई और उन्हें वरलक्ष्मी व्रत को करने का सुझाव दिया|
चारुमती ने यह बात अपने आस – पास की सभी महिलाओं को बताई| सभी ने एक साथ यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार के दिन किया|
चारुमती के साथ ही सभी महिलाओं ने भी इस व्रत को किया| सभी ने माता लक्ष्मी की पूजा और कलश की स्थापना की| उन्होंने कलश के चारों ओर परिक्रमा करके देवी माँ की पूजा की|
जिसकी वजह से लक्ष्मी माँ ने उनके घर को सोने से भर दिया, उन्हें सोने के आभूषणों से अलंकृत कर दिया|
सभी महिलाओं में चारुमती को धन्यवाद दिया क्योंकि उसने ही उन्हें इस व्रत के बारे में कहा था| मान्यता यह भी हैं कि इस व्रत के विषय में भगवान शिव ने माँ पार्वती को भी बताया था|
माँ वरलक्ष्मी के व्रत को करने के भी कुछ नियम है जिनका यदि आप पालन करते है तो आपको इससे बहुत लाभ होगा किन्तु यदि आपने इनका उल्लंघन किया तो आपको इसके लिए माता रानी द्वारा दंड भी मिल सकता है तो आइये जानते है कि वो नियम क्या है :-
इस व्रत को करते वक्त कुछ ध्यान देने योग्य बातें :
इस व्रत को करने का मुख्य उद्देश्य देवी माँ का आशीर्वाद पाना ही है| इस व्रत को करने के लिए कोई अधिक कठोर नियम नहीं है| ना ही इसका अनुष्ठान मुश्किल है बल्कि माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने लिए एक छोटी सी प्रार्थना ही काफी है|
जैसा कि आप सभी को पता है कि माँ लक्ष्मी धन, सुख, समृद्धि, धन, भाग्य, उदारता और साहस की देवी है| अधिकांश महिलाएं यह व्रत माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद लेने के लिए करती है|

सभी महिलाएं अपने – अपने पतियों की लम्बी उम्र के लिए माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करती है और अच्छी संतान पाने के लिए माता रानी से कामना करती है| इसे महिलाओं का त्यौहार भी कहा जाता है| स्कन्दपुराण में वरलक्ष्मी व्रत का महत्व बताया गया है|
इस व्रत को विवाहित महिलाएं करती है जो मुख्यतः अपने पतियों व बच्चों की लम्बी उम्र की कामना के लिए करती है| हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इस दिन माँ वरलक्ष्मी की पूजा करना अष्टलक्ष्मी की पूजा करने के समान है|
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हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वरलक्ष्मी व्रतं के बारे में बहुत अच्छे से बता दिया| आपको सिर्फ सच्चे मन से देवी मां की पूजा करनी है जिससे आप को उनका आशीर्वाद मिले और उनकी कृपा आपके ऊपर बनी रहे|
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यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को किया जाता है|
इस वर्ष यह त्यौहार 21 अगस्त 2026 को है|
सुबह जल्दी उठकर अपने सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके भगवान का ध्यान कीजिए| पूरे घर की अच्छे से सफाई कीजिए|