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Annapurna Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi: अन्नपूर्णा माता की आरती हिंदी में

Bhumika Singh
Written By Bhumika Singh
Last Updated March 22, 2026
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अन्नपूर्णा माता की आरती हिन्दू धर्म की ही एक मान्य देवी अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। यह माता अन्नपूर्णा माँ जगदम्बा का ही रूप मानी जाती है।

हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि माता जगदम्बा के रूप (अन्नपूर्णा माता) के कारण ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भरण पोषण होता है।

अन्नपूर्णा शब्द का अर्थ है – अन्न की अधिष्ठात्री देवी यानी अन्न प्रदान करने वाली। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अन्नपूर्णा आरती का पूर्ण भक्ति भाव से जाप करता है।

उस व्यक्ति पर हमेशा ही माता अन्नपूर्णा की कृपा बना रहती है। तो आइये जानते है अन्नपूर्णा माता की आरती के लिरिक्स के बारे में।

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अन्नपूर्णा माता की आरती लिरिक्स – Annapurna Mata Aarti Lyrics in Hindi

|| अन्नपूर्णा आरती ||

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
कहां उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
लेत होत सब काम॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती,
कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
चारु चक्रधर श्याम।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
शोभा लखहि ललाम॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

देवि देव! दयनीय दशा में,
दया -दया तब नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
शरण रूप तब धाम॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या,
श्री क्लीं कमला काम।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
वर दे तू निष्काम॥

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम।

॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥

Annapurna Mata Ki Aarti Lyrics in English – बारम्बार प्रणाम

|| Annapurna Aarti ||

Baaram baaram pranam,
Maiya baaram baaram pranam.

Jo nahi Dhyaave tumhe Ambike,
Kahaan use vishram.
Annapurna Devi naam tiharo,
Let hot sab kaam.

Baaram baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Pralay yugaantar aur janmaantar,
Kaalantar tak naam.
Sur suro ki rachna karti,
Kahaan Krishna kahaan Ram.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Chumahi charan chatur chaturaanan,
Charu chakradhar shyam.
Chandrachood chandraanan chakar,
Shobha lakhahi lalaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Devi Dev! Dayaniya dasha mein,
Daya-daya tab naam.
Trahitrahi sharanagat vatsal,
Sharan roop tab dhaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

Shreem, Hreem Shradhaa Shree A Vidya,
Shree Kleem Kamala Kaam.
Kaanti, Bhraantimayi, Kaanti Shaantimayi,
Var de tu nishkaam.

Baaram Baaram pranam
Maiya baaram baaram pranam.

|| Mata Annapurna ki Jai ||

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निष्कर्ष

हम रोज़ खाना खाते हैं, लेकिन कभी यह नहीं सोचते कि यह अन्न हमें मिला कहाँ से। हिन्दू धर्म कहता है – यह सब माँ अन्नपूर्णा की कृपा है। वे ही इस पूरी सृष्टि का पेट भरती हैं।

यहाँ तक कि खुद भगवान शिव भी काशी में माँ अन्नपूर्णा के द्वार पर भोजन माँगने आए थे। इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि अन्न और माँ अन्नपूर्णा का कितना महत्व है।

बारम्बार प्रणाम” केवल अन्नपूर्णा माता की आरती नहीं हैं बल्कि यह उस माँ के प्रति कृतज्ञता है जिनकी वजह से आज हम जीवित, स्वस्थ और खुश हैं।

अगली बार जब आप खाना खाएं, एक पल रुककर माँ अन्नपूर्णा को याद ज़रूर करें। 99Pandit हमेशा चाहता है कि आपकी भक्ति आसान हो और हर पूजा सही विधि से हो।

अगर आप घर पर माँ अन्नपूर्णा की विधिवत पूजा या कोई अन्य अनुष्ठान करवाना चाहते हैं तो 99Pandit पर अनुभवी पंडित जी बुक करें।

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Frequently Asked Questions

"अन्नपूर्णा" नाम का मतलब क्या होता है?

"अन्नपूर्णा" दो शब्दों से बना है - "अन्न" यानी भोजन और "पूर्णा" यानी जो हर चीज़ से भरी हो, जिसके पास कमी न हो। सीधे शब्दों में कहें तो माँ अन्नपूर्णा वह देवी हैं जिनके पास इतना अन्न है कि वे पूरी सृष्टि को भर सकती हैं, किसी को भूखा नहीं रहने देतीं।

अन्नपूर्णा माता की आरती कब करनी चाहिए?

माँ अन्नपूर्णा की आरती सुबह रसोई में खाना बनाने से पहले करना सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा शुक्रवार के दिन और नवरात्रि में इस आरती का विशेष महत्व है। अगर रोज़ नहीं कर सकते तो कम से कम हर शुक्रवार को माँ की आरती ज़रूर करें।

क्या खाना बनाने से पहले माँ अन्नपूर्णा की आरती करना ज़रूरी है?

ज़रूरी तो नहीं है लेकिन बहुत शुभ ज़रूर है। हिन्दू धर्म में रसोई को एक पवित्र स्थान माना जाता है और खाना बनाना एक यज्ञ के समान है। खाना बनाने से पहले माँ अन्नपूर्णा का नाम लेने से घर में हमेशा अन्न की कमी नहीं होती और परिवार स्वस्थ रहता है।

क्या सच में भगवान शिव ने माँ अन्नपूर्णा से भोजन माँगा था?

हाँ, यह बात पुराणों में लिखी है। एक बार भगवान शिव ने कहा कि इस संसार में सब कुछ माया है - अन्न-जल सब भ्रम है। तब माँ पार्वती जी अन्तर्ध्यान हो गईं और पूरी सृष्टि में अकाल पड़ गया। फिर सबको समझ आया कि अन्न कितना ज़रूरी है। माँ पार्वती काशी में माँ अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट हुईं और खुद भगवान शिव उनके द्वार पर भोजन माँगने आए। तभी से काशी में माँ अन्नपूर्णा का मंदिर है और कहा जाता है कि काशी में कोई भूखा नहीं सोता।


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