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Bhagavad Gita Chapter 2: भगवद गीता द्वितीय अध्याय अर्थ सहित

99Pandit Ji
Last Updated:December 21, 2023

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99Pandit

क्या आपने कभी भी अपने जीवन में श्री भगवद गीता का पाठ किया है? यदि नहीं तो हम आपके लिए एक नयी सीरीज प्रारंभ करने जा रहे है| जिसमे हम आपको गीता के प्रत्येक अध्याय में उपस्थित सभी श्लोकों के हिंदी अथवा अंग्रेजी अर्थ बतायेंगे| जिसकी सहायता से आप इस भगवद गीता द्वितीय अध्याय (Bhagavad Gita Chapter 2) को बहुत ही अच्छे से समझ पायेंगे, जिसमे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कई ज्ञान की बातें बताई है| इस पवित्र ग्रन्थ की रचना पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व महर्षि वेदव्यास जी के द्वारा की गई थी| आज हम भगवद गीता द्वितीय अध्याय (Bhagavad Gita Chapter 2)को हिंदी तथा अंग्रेजी अर्थ सहित आपको समझाएंगे|

Bhagavad Gita Chapter 2

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Chapter 2 – सांख्ययोग (Yoga Of Knowledge)

:- संजय उवाच :-
तं तथा कृपयाविष्टमश्रु पूर्णाकुलेक्षणम्‌।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः॥

हिंदी अर्थ – संजय बोले – तब करुणा – ग्रस्त और आंसुओं से पूर्ण, व्याकुल दृष्टि वाले, शोकयुक्त अर्जुन से भगवान मधुसूदन ने यह वचन कहा |

English Meaning – Sanjay said – Then Lord Madhusudan said these words to Arjun, filled with compassion and tears, with a troubled look and grief stricken.


श्रीभगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्‌।
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यम्‌ कीर्तिकरमर्जुन॥
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥

हिंदी अर्थ – श्रीभगवान बोले – हे अर्जुन ! तुम्हें इस असमय में यह शोक किस प्रकार हो रहा है? क्योकि न यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरित है, न स्वर्ग देने वाला है और न ही यश देने वाला है| हे पृथा – पुत्र ! कायरता को मत प्राप्त हो, यह तुम्हें शोभा नहीं देती है| हे शत्रु – तापन ! हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर युद्ध के लिए खड़े हो जाओ |

English Meaning – Lord Krishna said – O Arjun! How are you feeling this grief at this untimely time? Because it is neither practiced by great men, nor does it give heaven, nor does it give fame. O son of Pritha! Do not succumb to cowardice, it does not suit you. O enemy – heating! Abandon trivial weakness of heart and stand up for battle.


अर्जुन उवाच
कथं भीष्ममहं सङ्‍ख्ये द्रोणं च मधुसूदन।
इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन॥
गुरूनहत्वा हि महानुभावा ञ्छ्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके।
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुंजीय भोगान्‌ रुधिरप्रदिग्धान्‌॥

हिंदी अर्थ – अर्जुन बोले – हे मधुसूदन ! मैं रणभूमि में किस प्रकार बाणों से पितामह भीष्म और गुरु द्रोणाचार्य के विरुद्ध लडूंगा? क्योंकि हे अरिसूदन ! ये दोनों ही पूजनीय है | इन महान गुरुजनों को मारने से इस लोक में, मैं भिक्षा का अन्न खाना अधिक कल्याणकार समझता हूँ क्योंकि गुरुजनों को मारकर भी मैं उनके रुधिर से सने हुए अर्थ और कामरूप भोगों को ही तो भोगूँगा |

English Meaning – Arjun said – O Madhusudan! How will I fight with arrows in the battlefield against grandfather Bhishma and GuruDronacharya? Because O Arisudan! Both of them are worshipable. In this world, I consider it more beneficial to eat alms than to kill these great mentors, because even after killing the mentors, I will still enjoy the pleasures of artha and kamapra, stained with their blood.


न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः।
यानेव हत्वा न जिजीविषाम स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः॥
कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः।
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्‌॥

हिंदी अर्थ – हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए युद्ध करना श्रेष्ठ है या न करना और यह भी नहीं जानते कि हम उन्हें जीतेंगे या वह हमको जीतेंगे | जिनको वध करके हम स्वयं जीना नहीं चाहते, वे धृतराष्ट्र के पुत्र ही हमारे सम्मुख खड़े है | कायरता रूप दोष से पराजित स्वभाव वाला और धर्म के विषय में मोहित चित्त, मैं आपसे पूछता हूँ कि जो मेरे लिए निश्चित और कल्याणकारक साधन हो, वह बताइए | मैं आपका शिष्य हूँ, अतः मुझे शिक्षा दीजिये |

English Meaning – We don’t even know whether it is better for us to fight or not and we don’t even know whether we will conquer them or they will conquer us. Those whom we do not want to kill and live, those sons of Dhritarashtra are standing in front of us. Having a nature defeated by the vices of cowardice and a mind fascinated by religion, I ask you to tell me the sure and beneficial means for me. I am your disciple, so teach me.


न हि प्रपश्यामि ममापनुद्या द्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्‌।
अवाप्य भूमावसपत्रमृद्धं राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्‌॥
संजय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप।
न योत्स्य इतिगोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह॥

हिंदी अर्थ – पृथ्वी का सब प्रकार से समृद्ध और निष्कंटक राज्य पाकर या देवताओं का आधिपत्य पाकर भी मैं उस उपाय को नहीं देखता हूँ, जो इन्द्रियों को सुखाने वाले मेरे इस शोक को दूर कर सके | संजय बोले – निद्रा को जीतने वाले शत्रु – तापन अर्जुन ने अन्तर्यामी भगवान श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा | फिर हे गोविन्द ! ‘मैं युद्ध नहीं करूँगा’ ऐसा कहकर चुप हो गए |

English Meaning – Even after getting a prosperous and carefree kingdom on earth in every way or having the authority of the gods, I do not see the solution that can remove this grief of mine which dries up the senses. Sanjay said – The one who conquers sleep is the enemy – heat. Arjun said this to the innermost Lord Shri Krishna. Then O Govind! Saying this, ‘I will not fight’, he became silent.


तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत।
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदंतमिदं वचः॥
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥

हिंदी अर्थ – हे भरतवंशी धृतराष्ट्र ! अंतर्यामी भगवान श्रीकृष्ण दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए उस अर्जुन से हँसते हुए यह बोले | तुम शोक न करने योग्य मनुष्यों के लिए शोक करते हो और पंडितों जैसी बात भी करते हो, परन्तु बुद्धिमान लोग जिनके प्राण चले गए है, उनके लिए और जिनके प्राण नहीं गए है उनके लिए शोक नहीं करते है|

English Meaning – O Dhritarashtra of Bharatvanshi! Antaryami Lord Shri Krishna laughingly said this to Arjun while mourning between the two armies. You mourn for people who don’t deserve to mourn and also talk like scholars, but intelligent people don’t mourn for those who have died or those who haven’t.


न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्‌॥
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्ति र्धीरस्तत्र न मुह्यति॥

हिंदी अर्थ – न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था, तुम नहीं थे अथवा ये राजा लोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे| जैसे इस शरीर में जीवात्मा को कुमार, युवा और वृद्धावस्था प्राप्त होती है, वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति भी होती है, इस विषय में धीर पुरुष मोहित नहीं होता है|

English Meaning – Neither is it that I did not exist in any time, you were not there or these kings were not there nor is it that we all will not exist from this onwards. Just as the soul in this body attains virginity, youth and old age, in the same way it attains another body, a patient person is not deluded in this matter.


मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्या स्तांस्तितिक्षस्व भारत॥
यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ।
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते॥

हिंदी अर्थ – हे कुंतीपुत्र ! सर्दी – गर्मी और सुख – दुःख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग तो उत्पत्ति – विनाशशील और अनित्य है, इसलिए हे भारत ! तुम उनको सहन करो| क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! दुःख – सुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इन्द्रिय और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते, वह मोक्ष के योग्य हो जाता है|

English Meaning – O son of Kunti! The combinations of senses and objects that give rise to cold-heat and happiness-sorrow are destructible and impermanent, hence O India! You tolerate them. Because oh best man! The patient person who considers happiness and sorrow as equal and is not disturbed by the combination of senses and objects, becomes eligible for salvation.


नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः।
उभयोरपि दृष्टोऽन्त स्त्वनयोस्तत्वदर्शिभिः॥
अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्‌।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति॥

हिंदी अर्थ – असत्‌ वस्तु की तो सत्ता नहीं है और सत्‌ का अभाव नहीं है| इस प्रकार इन दोनों का ही तत्व ज्ञानी पुरुषों के द्वारा देखा गया है| नाशरहित तो तुम उसको जानो, जिससे यह सम्पूर्ण दृश्य जगत व्याप्त है| इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है|

English Meaning – The unreal has no existence and the real has no absence. In this way, the essence of both of these has been seen by wise men. Only you know Him to be immortal, through whom this entire visible world is pervaded. No one is capable of destroying this indestructible thing.

Bhagavad Gita Chapter 2

अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः।
अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत॥
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्‌।
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते॥

हिंदी अर्थ – इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के ये सब शरीर नाशवान कहे गए है, इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन ! तुम युद्ध करो| जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है और जो इसको मरा हुआ मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते क्योंकि यह आत्मा वास्तव में न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जा सकता है|

English Meaning – All these bodies of this imperishable, immeasurable, eternal soul are said to be perishable, hence O Arjun of Bharatvanshi! You fight. The one who considers this soul to be a killer and the one who considers it dead, both of them do not know because in reality this soul neither kills anyone nor can be killed by anyone.


न जायते म्रियते वा कदाचि न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्‌।
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्‌॥

हिंदी अर्थ – यह आत्मा किसी भी काल में ना तो जन्म लेती है और ना ही मरती है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर न होने वाला ही है क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी आत्मा नही मरती है| हे पृथापुत्र अर्जुन ! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसी को मार या मरवा सकता है|

English Meaning – This soul neither takes birth nor dies at any time, nor is it going to be born again, because it is unborn, eternal, eternal and ancient, the soul does not die even after the death of the body. O Arjun, son of Pritha! How can a person who knows this soul to be indestructible, eternal, unborn and indestructible, kill or cause someone to be killed?


वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥

हिंदी अर्थ – जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दुसरे नए वस्त्रों को धारण करता है, उसी प्रकार ही जीवात्मा भी पुराने शरीर को त्यागकर दुसरे नए शरीरों को प्राप्त होती है| इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, आग इसको जला नहीं सकती, जल इसको गला सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती|

English Meaning – Just as a human being gives up old clothes and puts on new clothes, in the same way the soul also gives up the old body and acquires new bodies. Weapons cannot cut this soul, fire cannot burn it, water cannot melt it and air cannot dry it.


अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयम क्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयम विकार्योऽयमुच्यते।
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि॥

हिंदी अर्थ – यह आत्मा अच्छेघ है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेघ और नि:संदेह अशोष्य है| यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर और सनातन है| यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है| इसलिए हे अर्जुन ! इस आत्मा को इस प्रकार से जानकर तुम्हारे लिए शोक उचित नहीं है|

English Meaning – This soul is impermeable, this soul is incombustible, un-dissolvable and undoubtedly undryable. This soul is eternal, omnipresent, immovable, stable and eternal. This soul is unmanifested, this soul is unthinkable and this soul is said to be free from disorders. So O Arjun! It is not appropriate for you to mourn after knowing this soul in this manner.


अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्‌।
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि॥
जातस्त हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि॥

हिंदी अर्थ – किन्तु यदि तुम इस आत्मा को सदा जन्मने वाला तथा सदा मरने वाला भी मानो, तो भी हे महाबाहो ! तुम्हे इस प्रकार शोक नहीं करना चाहिए क्योंकि जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म भी निश्चित है| इसलिए इस अनिवार्य विषय में तुम शोक करने योग्य नहीं हो|

English Meaning – But even if you consider this soul to be always born and always dying, then also O mighty-armed one! You should not mourn like this because the death of the one who is born is certain and the birth of the one who dies is also certain. Therefore you are not worthy of mourning over this inevitable matter.


अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना॥
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः।
आश्चर्यवच्चैनमन्यः श्रृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित्‌॥

हिंदी अर्थ – हे अर्जुन ! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले है, केवल बीच में ही प्रकट है, फिर इस स्थिति में क्या शोक करना | कोई एक आत्मदर्शी ही इस आत्मा को आश्चर्य की भांति देखता है और वैसे ही कोई दूसरा आत्मज्ञ ही इसके तत्व का आश्चर्य की भांति वर्णन करता है तथा अन्य कोई अधिकारी ही इसे आश्चर्य की भांति सुनता है और कोई तो सुनकर भी इसे नही जानता |

English Meaning – O Arjun! All beings were invisible before birth and will become invisible even after death, they are visible only in the middle, then why to mourn in this situation. Only one ascetic sees this soul as a wonder and similarly only another astute describes its essence as a wonder and only another authority hears it as a wonder and someone does not know it even after hearing it.


देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि॥
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि।
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत् क्षत्रियस्य न विद्यते॥

हिंदी अर्थ – हे अर्जुन ! सबके शरीर में स्थित यह आत्मा सदा ही अवध्य है| इसलिए तुम्हे किसी भी प्राणी के लिए शोक नहीं करना चाहिए और अपने धर्म को देखकर भी तुम भय करने योग्य नहीं हो क्योंकि क्षत्रिय के लिए धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर कोई दूसरा कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है|

English Meaning – Hey Arjun! This soul present in everyone’s body is always immortal. Therefore, you should not mourn for any living being and you should not be afraid even after seeing your religion because for a Kshatriya there is no other more welfare duty than righteous war.


यदृच्छया चोपपन्नां स्वर्गद्वारमपावृतम्‌।
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्‌॥
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं सङ्‍ग्रामं न करिष्यसि।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि॥

हिंदी अर्थ – हे पार्थ ! अपने – आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार – रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय ही पाते है| किन्तु यदि तुम इस धर्मयुक्त युद्ध को नहीं करोगे तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होंगे |

English Meaning – Hey Parth! Only the fortunate Kshatriyas get to fight this type of war which is automatically achieved and opens the doors of heaven. But if you do not wage this righteous war, you will lose your self-righteousness and fame and commit sin.


अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्‌।
सम्भावितस्य चाकीर्ति र्मरणादतिरिच्यते॥
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम्‌॥

हिंदी अर्थ – और सब लोग तुम्हारी बहुत समय तक रहने वाली अकीर्ति की भी चर्चा करेंगे और प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए अकीर्ति मृत्यु से भी बढ़कर मानी जाती है और जिनकी दृष्टि में तुम बहुत सम्मानित हो, अब उनके मत में तुच्छता को प्राप्त होंगे, वे महारथी लोग तुम्हे भय के कारण युद्ध से हटा हुआ मानेंगे|

English Meaning – And everyone will also talk about your infamy that lasted for a long time and for an eminent person, infamy is considered worse than death and in whose eyes you are very respected, now you will be reduced to insignificance in their opinion, those great people will fear you. Due to this will be considered as removed from the war.

Bhagavad Gita Chapter 2

अवाच्यवादांश्च बहून्‌ वदिष्यन्ति तवाहिताः।
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्‌॥

हिंदी अर्थ – शत्रु – गण तुम्हारे सामर्थ्य की निंदा करते हुए तुम्हे बहुत से न कहने योग्य वचन भी कहेंगे, उससे अधिक दु:खदायक और क्या होगा?

English Meaning – Enemies will criticize your abilities and will also say many unspeakable words to you, what could be more painful than that?


हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्‌।
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः॥
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥

हिंदी अर्थ – यदि तुम युद्ध में मारे गए तो तुम स्वर्ग को प्राप्त करोगे अन्यथा युद्ध में जीतकर पृथ्वी का राज्य भोगोगे| इसलिए हे अर्जुन ! तुम युद्ध का निश्चय करके खड़े हो जाओ| जय – पराजय, लाभ – हानि और सुख – दुःख को समान समझकर, युद्ध में लग जाओ, इस प्रकार युद्ध करने से तुम पाप को प्राप्त नहीं होगे|

English Meaning – If you are killed in the war then you will attain heaven otherwise after winning the war you will enjoy the kingdom of the earth. Therefore O Arjun! You decide to fight and stand up. Considering victory-defeat, profit-loss and happiness-sorrow as equal, engage in war, by fighting in this way you will not commit sin.


एषा तेऽभिहिता साङ्‍ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां श्रृणु।
बुद्ध्‌या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि॥
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवातो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्‌॥

हिंदी अर्थ – हे पार्थ ! तुम्हारे लिए यह बुद्धि ज्ञानयोग के विषय में कही गई और अब तुम इसको कर्मयोग के विषय में सुनो| जिस बुद्धि से युक्त होकर तुम कर्मो के बंधन को नष्ट कर सकोगे| इस कर्मयोग में आरंभ का नाश नहीं है और इसमें उल्टा फलरूप दोष भी नहीं है, बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोडा भी साधन जन्म – मृत्यु रूपी महान भय से रक्षा कर लेता है|

English Meaning – Hey Parth! For you this wisdom was said about Gyan Yoga and now you listen to it about Karma Yoga. By possessing this intelligence you will be able to destroy the bondage of karma. In this Karmayoga, there is no destruction of the beginning and there is no defect in the form of opposite results, rather even a little practice of Dharma in the form of this Karmayoga protects from the great fear of birth and death.


व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन।
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्‌॥
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः।
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः॥

हिंदी अर्थ – हे अर्जुन ! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिक बुद्धि एक ही होती है, किन्तु अस्थिर विचार वाले मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदों वाली और अनंत होती है| हे अर्जुन ! जो अयथार्थ वेद के कहने वाले अविवेकीजन इस प्रकार की शोभायुक्त वाणी कहा करते है कि स्वर्ग से बढ़कर दूसरी कोई वस्तु ही नहीं है|

English Meaning – Hey Arjun! In this Karmayoga, there is only one determined intellect, but the intellects of people with unstable thoughts are definitely diverse and infinite. Hey Arjun! The ignorant people who say the inauthentic Vedas say such beautiful words that there is nothing greater than heaven.


कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्‌।
क्रियाविश्लेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति॥
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्‌।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते॥

हिंदी अर्थ – जिनके लिए स्वर्ग ही परम प्राप्य है, जो कि जन्मरूप कर्मफल देने वाली एवं भोग तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए नाना प्रकार की बहुत – सी क्रियाओं में रूचि रखने वाले है, जो भोग और ऐश्वर्य में अत्यंत आसक्त है, और जिनका चित्त उस वाणी द्वारा हर लिया गया है, उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चियात्मिका बुद्धि नहीं होती|

English Meaning – For those for whom heaven is the ultimate attainment, who are interested in many types of activities that give the fruits of their birth and for the attainment of pleasures and opulences, who are extremely attached to pleasures and opulences, and whose mind is controlled by that speech. It has been said that those men do not have the decisive intellect in God.


त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्‌॥
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके।
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः॥

हिंदी अर्थ – हे अर्जुन ! वेद तीनों गुणों (सत्त्व, रज और तम) के कार्य रूप समस्त भोगों एवं उनके साधनों का प्रतिपादन करने वाले है, इसलिए तुम उन भोगों एवं उनके साधनों में आसक्तिहीन, हर्ष – शोकादि द्वंदों से रहित, नित्यवस्तु परमात्मा में स्थित योग (अप्राप्त की प्राप्ति का नाम ‘योग’ है) क्षेम (प्राप्त वस्तु की रक्षा का नाम ‘क्षेम’ है|) को न चाहने वाले और आत्म – परायण बनो |

English Meaning – Hey Arjun! Vedas are the ones that explain all the pleasures and their means as the working form of the three Gunas (Sattva, Raja and Tama), hence you are free from attachment to those pleasures and their means, free from joy-sorrow conflicts, situated in the eternal God, Yoga (attainment of the unattainable) The name of this is ‘Yoga’) Do not seek welfare (the name of protection of the achieved thing is ‘Kshem’) and become self-reliant.

Bhagavad Gita Chapter 2

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥
योगस्थः कुरु कर्माणि संग त्यक्त्वा धनंजय।
सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

हिंदी अर्थ – तुम्हारा अधिकार कर्म करने में ही है, उनके फलों में नहीं| तुम कर्मों के फल का कारण मत बनों और तुम्हारी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो| हे धनंजय ! योग में स्थित रहते हुए तुम आसक्ति को त्यागकर , सिद्धि और आसिद्धि में समान रह कर कर्मों को करो, इस समता को ही योग कहते है|

English Meaning – Your right lies only in the actions you perform, not in their fruits. Do not become the cause of the consequences of your actions and do not be attached to not doing your actions. Hey Dhananjay! While remaining situated in Yoga, you should give up attachment and do your work with equality in accomplishment and accomplishment, this equality is called Yoga.


दूरेण ह्यवरं कर्म बुद्धियोगाद्धनंजय।
बुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः॥
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्‌॥

हिंदी अर्थ – हे धनंजय ! इस समता रूपी बुद्धि योग से सकाम कर्म अत्यंत ही निम्न श्रेणी के है इसलिए यौम समबुद्धि का ही आश्रय लो क्योंकि आसक्ति पूर्वक कर्म करने वाले अत्यंत दीन है| (सम) बुद्धियुक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों से इसी लोक में मुक्त हो जाता है इसलिए तुम समत्व रूप योग के लिए प्रयत्न करो, यह समत्व रूप योग ही कर्मों में कुशलता है|

English Meaning – O Dhananjay! The actions resulting from this yoga of equanimity of intellect are of very low grade, hence take shelter only of equanimity of mind because those who perform actions with attachment are extremely miserable. A person with (equal) intelligence becomes free from both virtue and sin in this world, therefore you should strive for equanimity of yoga, this equanimity of yoga is efficiency in actions.


कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्‌॥
यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च॥

हिंदी अर्थ – क्योंकि कर्म – बुद्धि से युक्त मनीषी (विचारक) भी कर्मों के फल को त्यागकर जन्म – रूपी बंधन से मुक्त होकर निर्विकार परम पद को प्राप्त हो जाते है| (इस प्रकार कर्म करते हुए) जिस काल में तुम्हारी बुद्धि मोहरूपी दलदल को भली – भांति पार कर जाएगी, उस समय तुम सुने हुए और भविष्य में सुनने वाले सभी भोगों से वैराग्य को हो जाओगे|

English Meaning – Because the wise man (thinker) who has the intellect of karma also, by renouncing the fruits of his actions, gets freed from the bondage of birth and attains the supreme position without any vices. (By acting in this manner) at the time when your intellect will cross the mire of illusion, at that time you will become detached from all the pleasures you have heard and will hear in the future.


श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला।
समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि॥
अर्जुन उवाच
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव।
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्‌॥

हिंदी अर्थ – भांति – भांति के वचनों को सुनने से विचलित हुई तुम्हारी बुद्धि जब स्थिर होकर अचल समाधि में स्थित हो जाएगी तब तुम्हारी बुद्धि योग को प्राप्त हो जाएगी| अर्जुन बोले – हे केशव ! समाधि में स्थित स्थिर प्रज्ञा वाले पुरुष का क्या लक्षण है? वह स्थिर – बुद्धि वाला पुरुष कैसे बोलता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता है?

English Meaning – When your mind, which has been distracted by listening to various words, becomes stable and becomes stable in stable samadhi, then your mind will attain Yoga. Arjun said – Hey Keshav! What is the characteristic of a person with stable intelligence in samadhi? How does that stable-minded man speak, how does he sit and how does he walk?


श्रीभगवानुवाच प्रजहाति यदा कामान्‌ सर्वान्पार्थ मनोगतान्‌।
आत्मयेवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते॥
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते॥

हिंदी अर्थ – भगवान श्रीकृष्ण बोले – हे अर्जुन ! जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भलीभांति त्याग देता है और मन में आत्म – स्वरुप का चिंतन करता हुआ उसी में संतुष्ट रहता है, उस काल में वह स्थितप्रज्ञ का चिंतन करता हुआ उसी में संतुष्ट रहता है, उस काल में वह स्थितप्रज्ञ कहा जाता है| दु:खों की प्राप्ति होने पर जिसके मन में उद्वेग नहीं होता, सुखों की प्राप्ति में सर्वथा नि:स्पृह है तथा जिसके राग, भय और क्रोध नष्ट हो गए है, ऐसा मुनि स्थिर – बुद्धि कहा जाता है|

English Meaning – Lord Shri Krishna said – O Arjun! During the period when this person completely abandons all the desires present in the mind and remains contented in the same while contemplating the Self in the mind, in that period he remains satisfied in the same while contemplating the situated Pragya, in that period he Is called Sthitapragya. A sage whose mind does not get agitated after suffering, who is completely disinterested in attaining happiness and whose attachment, fear and anger have been destroyed, is said to have a stable mind.

Bhagavad Gita Chapter 2

यः सर्वत्रानभिस्नेहस् तत्तत्प्राप्य शुभाशुभम्‌।
नाभिनंदति न द्वेष्टि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥
यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गनीव सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस् तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥

हिंदी अर्थ – जो पुरुष सर्वत्र स्नेहरहित हुआ प्रारब्धवश प्राप्त शुभ या अशुभ से न प्रसन्न होता है और न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि स्थिर है| जैसे कच्छुआ अपने अंगों को सब ओर से समेत लेता है, उसी प्रकार जब यह पुरुष इन्द्रियों को इन्द्रियों के विषयों से सब प्रकार से हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर है|

English Meaning – The person who is devoid of affection everywhere and is neither happy nor averse to the good or bad received by his destiny, his intellect is stable. Just as a tortoise covers its body parts from all sides, in the same way, when a man removes his senses from the objects of the senses in all respects, then his intelligence is stable.


विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते॥
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः।
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः॥

हिंदी अर्थ – इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुषों के भी विषय तो निवृत्त नहीं होती| इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाती है| हे अर्जुन ! (आसक्ति का नाश होने के कारण) यत्न करते हुए बुद्धिमान पुरुष के मन को भी ये इन्द्रियाँ बलात्‌ हर लेती है|

English Meaning – Even for those who do not grasp objects through their senses, their objects do not go away. Even the attachment of a man of this state of wisdom goes away after realizing God. Hey Arjun! (Due to destruction of attachment) these senses forcefully take away even the mind of an intelligent person while making efforts.


तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥
ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते।
संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

हिंदी अर्थ – इसलिए साधक उन सारी इन्द्रियों को वश में करके समाहित चित्त हुआ मेरे परायण होकर ध्यान में बैठे क्योंकि जिस पुरुष की इन्द्रियां वश में होती है, उसकी बुद्धि स्थिर हो जाती है| विषयों का चिंतन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है|

English Meaning – Therefore, the seeker, after controlling all those senses, becomes devoted to me and has an absorbed mind and sits in meditation because the intellect of a person whose senses are under control becomes stable. A person who contemplates on subjects becomes attached to those subjects, from attachment arises desire for those subjects and when there is an obstacle in the desire, anger arises.


क्रोधाद्‍भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्द्रियैश्चरन्‌।
आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति॥

हिंदी अर्थ – क्रोध से अत्यंत मूढ़ भाव उत्पन्न हो जाता है, मूढ़ भाव से स्मृति – भ्रंश हो जाने से बुद्धि नाश हो जाता है और बुद्धि का नाश हो जाने से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है| अपने वश में किये हुए अन्तः करण की निर्मलता को प्राप्त होता है|

English Meaning – Anger gives rise to extremely foolish feelings, due to loss of memory due to foolish feelings, the intellect gets destroyed and due to the destruction of the intellect, the person falls from his position. One attains the purity of the conscience under one’s control.


प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते।
प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते॥
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिर शान्तस्य कुतः सुखम्‌॥

हिंदी अर्थ – अन्तः करण निर्मल होने पर इसके सभी दुखों का नाश हो जाता है और उस प्रसन्न – चित्त वाले उस कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर हो जाती है| योग – रहित पुरुष की निश्च्यात्मिकता बुद्धि नहीं होती और उस अयुक्त पुरुष में आत्म – विषयक भावना भी नहीं होती| भावनाहीन मनुष्य को शान्ति नहीं मिलता और अशांत मनुष्य को सुख कहाँ?

English Meaning – When the heart becomes pure, all its sorrows are destroyed and the intellect of that Karmayogi with a happy mind soon becomes stable. A person without yoga does not have the mindless intellect and the uneducated person also does not have a sense of self. An emotionless man does not get peace and where can a disturbed man find happiness?


इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि॥
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस् तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥

हिंदी अर्थ – क्योंकि विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों से संयुक्त होकर मन बुद्धि को वैसे ही हर लेता है जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु| इसलिए हे महाबाहो ! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के विषयो में सब प्रकार से निग्रह की हुई है, उसकी बुद्धि स्थिर है|

English Meaning – Because the mind, combined with the senses wandering in objects, takes away the intellect just like the wind takes over a boat moving on water. That’s why oh great arms! The person whose senses and objects of the senses are controlled in every way, his intellect is stable.


या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः॥
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत्‌।
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी॥

हिंदी अर्थ – आत्म – विषयक जो बुद्धि सम्पूर्ण प्राणियों के लिए रात्रि के समान (अज्ञात) है, उस आत्मा – विषयक बुद्धि में जितेन्द्रिय पुरुष जागता है और जिस अनात्म – विषयक बुद्धि में सब प्राणी जागते है, उस मुनि के लिए वह रात्रि के समान है| जैसे सब ओर से परिपूर्ण, अचल प्रतिष्ठा वाले समुन्द्र में (अनेक नदियों के जल) उसमे क्षोभ न उत्पन्न करते हुए समा जाते है, वैसे ही जिस पुरुष में सब भोग बिना किसी प्रकार का विकार उत्पन्न किए समा जाते है, वही पुरुष शान्ति को प्राप्त होता है, भोगो को चाहने वाला नहीं|

English Meaning – The soul-related intelligence which is like night (unknown) to all living beings, in that soul-related intelligence the Jitendriya Purusha is awake and the non-soul-related intelligence in which all beings are awake is like night for that sage. Just as the waters of the many rivers (waters of many rivers) are absorbed into the ocean, which is perfect from all sides, without creating any disturbance in it, similarly, the man in whom all the pleasures are absorbed without creating any kind of disorder, only he is the man who attains peace. It happens that he is not a lover of pleasures.

Bhagavad Gita Chapter 2

विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति॥
एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति॥

हिंदी अर्थ – जो पुरुष सम्पूर्ण कामनाओं को त्यागकर, ममतारहित, अहंकाररहित और स्पृहारहित हुआ विचरता है, वह शान्ति को प्राप्त होता है| हे अर्जुन ! यह ब्रह्म को प्राप्त हुए पुरुष की स्थिति है, इसको प्राप्त होकर मनुष्य फिर कभी मोहित नहीं होता और अन्तकाल मे भी इस ब्राह्मी स्थिति में स्थित होकर ब्रह्मानन्द को प्राप्त हो जाता है|

English Meaning – The man who gives up all desires and wanders without affection, without ego and without desires, attains peace. Hey Arjun! This is the state of a man who has attained Brahma, after attaining this man never gets deluded again and even in the last moments, being situated in this Brahmi state, he attains Brahmananda.


|| द्वितीय अध्याय समाप्त ||

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