AartiSatyanarayan Aarti Lyrics: सत्यनारायण आरती – ॐ जय लक्ष्मी रमणा
सत्यनारायण आरती (Satyanarayan Aarti Lyrics) भगवान विष्णु के रूप भगवान सत्यनारायण को समर्पित मानी जाती है। यदि आप…
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सरस्वती वंदना का गान माता सरस्वती की आराधना करते समय किया जाता है| माता सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है|
उन्हें प्रसन्न करने के लिए ही सरस्वती वंदना का जाप किया जाता है| यह सरस्वती वंदना कई कार्यस्थलों तथा स्कूलों में की जाती है| माना जाता कि यह सरस्वती वंदना (Saraswati Vandana) विद्यार्थियों के बहुत ही लाभदायक होती है|

जो भी भक्त इस वंदना को नियमित रूप से करता है, उसे माता सरस्वती का आशीर्वाद तथा माता की कृपा प्राप्त होती है| तो आइये जानते है सरस्वती वंदना हिंदी अर्थ सहित|
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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
हिंदी अर्थ – जो विद्या की देवी माता सरस्वती कुंद के फूल, चंद्रमा, हिमराशि तथा मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है| जिनके हाथ में वीणा शोभायमान है, जिन्होंने स्वेट कमल पर अपना आसन ग्रहण कर किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु तथा भगवान शंकर के द्वारा जो सदा पूजित है| वही सम्पूर्ण जड़ता तथा अज्ञानता को दूर करने वाली देवी माता सरस्वती हमारी रक्षा करे|
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
हिंदी अर्थ – शुक्लवर्ण वाली, पूरे संसार में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों में भयदान देने वाली, अज्ञानता के अंधकार को दूर करने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक धारण करने वाली तथा पद्मासन पर विराजमान, बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत माता शारदा देवी की मैं वंदना करता हूँ|

Ya kundendu tushaarahara dhavala, ya shubhra vashtraavritaa,
Ya veena varadanda manditakaraa, ya shvet padmaasanaa.
Ya brahmaachyuta shankara Prabhritibhir Devaih sadaa vanditaa,
Saa maan paatu Saraswati Bhagavati nihshesha jaadyaapahaa.
Shuklaam Brahmavichaar Saar Paramaam Aadyaam Jagadvyapinim
Veena-Pustak-Dhaarinim Abhayadaam Jaadyaandhakaaraapahaam.
Haste Sphatikamaalikaam Vidhadhateem Padmaasane Sthitaam
Vande Taam Parameshwariim Bhagavatiim Buddhipradaam Shaaradaam॥
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