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108 Names of Lord Hanuman: हनुमान जी के 108 नाम व उनके अर्थ

Bhumika Singh
Written ByBhumika Singh
Last UpdatedMarch 30, 2026
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जब जीवन के रास्ते पर कोई साथ ना हो और डर आँखों के सामने घूम रहा हो, तब एक ही नाम है जो हमारे मन को सहारा देता है – “जय बजरंगबली”|

हम भारतवासियों/भारत के वासियों के लिए हनुमान जी सिर्फ एक देवता नहीं है, वह भक्ति का रूप, शक्ति का संकल्प और सेवा का प्रतीक है|

उनका हर एक नाम, एक कहानी के जैसा है – जो अँधेरे में रौशनी बन जाता है| बचपन से हमने सुना है – “राम के भक्त” “पवनपुत्र” “संकटमोचन” “अंजनि सुत” आदि|

पर क्या कभी आपने सोचा है कि इनके 108 नाम क्यों हैं? क्या हर नाम का कोई मतलब है, कोई कहानी या रहस्य छुपा है? प्रमुख रूप से हनुमान जी के 12 नाम है जो की अत्यंत सुन्दर एक भावपूर्ण है|

हनुमान जी अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर उनका उद्धार करते हैं उनके संकट हर लेते है इसी कारण उन्हें “संकटमोचन” भी कहा जाता हैं|

आइये आज हम आपको बताते हैं हनुमान जी के 108 नाम, उनका अर्थ और उनका गहरा भाव|

लेकिन 108 नाम ही क्यों ? 109 या 50 क्यों नहीं ?

सनातन धर्म में 108 एक पवित्र और शक्तिशाली संख्या मानी जाती हैं;

  • 12 राशि x 9 ग्रह = 108
  • जाप माला के 108 मोती
  • योग में 108 प्राणायाम
  • सूर्य और चन्द्र – पृथ्वी से लगबघ 108 गुना दूर
  • 108 भाव – जीवन की अलग – अलग स्थितियां

हनुमान जी के 108 नाम भी एक आध्यात्मिक यात्रा हैं जैसे हर नाम एक दिशा देता है – भक्ति का, शक्ति का , ज्ञान का, और विवेक का|

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भगवान हनुमान जी के 108 नाम व उनके अर्थ

NameMantraMeaning
आंजनेयॐ आन्ज्नेयाय नमः (om anjaneyaya namaha)जो देवी अंजना के पुत्र है, उनको मेरा नमस्कार
महावीरॐ महावीराय नमः (om mahaviraya namah)जो अति बलशाली और पराक्रमी है, उनको मेरा नमस्कार
हनुमानॐ हनुमते नमः (om hanumate namah)जो फुले हुए गालो वाले है, उनको मेरा नमस्कार
रामदूतॐ रामदूताय नमः (om ramdutay namah)जो भगवान श्री राम के दूत है, उनको मेरा नमस्कार
मारुतात्मजॐ मारुतात्मजाय नमः (om marutatmjaaye namah)जो पवन देव के पुत्र है, उनको मेरा नमस्कार
संजीवान्न्गाहर्ताॐ संजीवान्न्गाहर्ता नमः (om sanjeevanngaharta namah)जो संजीवनी पर्वत को लेके आने वालें है, उनको मेरा नाम नमस्कार
लक्ष्मणप्राणदाताॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः (om lakshmanpraandaatre namah)जो लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा करने वालें है, उनको मेरा नमस्कार
सीतान्वेष्णपण्डितॐ सीतावेषणपण्डिताय नमः (om seetaveshanpanditaay namah)जो माता सीता को ज्ञानपूर्वक खोजने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
सीताशोकनिवारकॐ सीताशोक्निवाराकाय नमः (om seetashoknivaarkaay namah)जो सीता माता के दुःख दूर करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
रामभक्तॐ रामभक्ताय नमः (om rambhaktaay namah)जो भगवान श्री राम के परम भक्त है, उनको मेरा नमस्कार
दश्ग्रीव्कुलान्तकॐ दश्ग्रीव्कुलान्तकाय नमः (om dashgreevkulantkaay namah)जो रावण के कुल का अंत करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
वज्र्कायॐ वज्रकायाय नमः (om vajrakayaay namah)जिनका शरीर वज्र के सामान कठोर है, उनको मेरा नमस्कार
महातपसॐ महाताप्स्वेयाय नमः (om mahatapasveyaay namah)जो महान तपस्वीं है, उनको मेरा नमस्कार
पञ्चवक्त्रॐ पंचवक्त्राय नमः (om panchavaktra namah)जिनके पांच मुख है, जो पञ्चमुखी है, उनको मेरा नमस्कार
चिरंजीवीॐ चिरंजीविने नमः (om chiranjeevine namah)जो अजर-अमर है, जो चिरंजीवी है, उनको मेरा नमस्कार
बल्सिद्धिकारॐ बल्सिद्धिकराय नमः (om balsiddhikaraay namah)जो बल प्रदान करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
शूरॐ शूराय नमः (om shuraay namah)जो अत्यंत वीर है, उनको मेरा नमस्कार
प्रभुॐ प्रभवे नमः (om prabhve namah)जो सम्पूर्ण श्रृष्टि में पूजे जाते है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वरोगहरॐ सर्वरोगहराय नमः (om sarvrogharaay namah)जो सभी रोगों का नाश करते है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वबन्धाविमोक्ताॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः (om sarvbandhvimoktre namah)जो समस्त बन्धनों से मुक्त करते है, उनको मेरा नमस्कार
सर्व्गहविनाशीॐ सर्व्गहविनाशिने नमः (om sarvgrehvinaashine namah)जो सभी ग्रहदोषों को हरते है, उनको मेरा नमस्कार
रामचुडामणिप्रदॐ रामचुडामणिप्रदायकाय नमः (om raamchudahmanipradaaykaay namah)जो श्री राम को माता सीता की चूडामणि प्रदान करते है, उनको मेरा नमस्कार
सुग्रीवसचिवॐ सुग्रीवसचिवाय नमः (om sugreevsachivaay namah)जो महाराज सुग्रीव के सचीव है, जो महाराज सुग्रीव के मंत्री है, उनको मेरा नमस्कार
विभीषणप्रियकरॐ विभीषणप्रियकराय नमः (om vibhishanpriyakraay namah)जो विभीषण के प्रिय है, उनको मेरा नमस्कार
अक्षहन्ताॐ अक्षहंत्रे नमः (om aksh-hantre namah)जो रावण के पुत्र अक्षय का वद्ध करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
लंकपुरविदाहकॐ लंकपुरविदाहकाय नमः (om lankpurvidaahak namah)जो लंका को जला देने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
कालनेमीप्रमथनॐ कालनेमीप्रमथन नमः (om kaalnemipramthan namah)जो कालनेमि राक्षस को नष्ट करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
भीमसेनसहायकृतॐ भीमसेनसहायकृते नमः (om bheemsensahaaykrte namah)जो महाभारत में भीम की सहायता करते है, उनको मेरा नमस्कार
वानरॐ वानराय नमः (om vanaraaye namah)जो वानर रुपी है, जो वानर रूप में प्रकट हुए है, उनको मेरा नमस्कार
केसरीसूतॐ केसरीसुताय नमः (om kesrisutaay namah)जो केसरी नंदन है, जो राजा केसरी के पुत्र है, उनको मेरा नमस्कार
तत्त्वज्ञानप्रदॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः (om tatvgyannpradaay namah)जो तत्वों का ज्ञान प्रदान करते है, उनको मेरा नमस्कार
अशोकवानिकाछेत्ताॐ अशोकवानिकाछेत्रे नमः (om ashokvaanikachhetre namah)जो अशोक वाटिका को उजाड़ने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
सर्व्मायाविभिणजनॐ सर्व्मायाविभिणजनाय नमः (om sarvmaayabhinnjanaay namah)जो समस्त माया का विनाश करते है, उनको मेरा नमस्कार
परर्शौर्यविनाशनॐ परर्शौर्यविनाश्नाय नमः (om parshauryavinaashan namah)जो शत्रुओं के शौर्य का अंत करते है, उनको मेरा नमस्कार
परमन्त्रनिराकर्ताॐ परमन्त्रनिराक्रतें नमः (om paramantrnirakrta namah)जो शत्रुओं के मंत्रो को व्यर्थ/निष्फल करते है, उनको मेरा नमस्कार
परयंत्रप्रभेदकॐ परयंत्रप्रभेदकाय नमः (om paryanprabhedkaay namah)जो शत्रुओं की योजनाओं को असफल करते है, उनको मेरा नमस्कार
कपीश्वरॐ कपीश्वराय नमः (om kapeeshvaraay namah)जो वानरों के स्वामी है, उनको मेरा नमस्कार
परविद्यापरिहारॐ पर्वविद्यापरिहाराय नमः (om parv-vidyaparihaaray namah)जो शत्रुओ के ज्ञान को निष्फल करते है, उनको मेरा नमस्कार
मनोजवॐ मनोजवाय नमः (om manojvaay namah)जो वायु के सामान गति वाले है, उनको मेरा नमस्कार
गंधमादनशेलसथयॐ गंध्मादनशेलस्थाय नमः (om gandhmaadanshelasthaay namah)जो गंधमादन पर्वत पर निवास करते है, उनको मेरा नमस्कार
भविष्यचतुराननॐ भाविश्यचतुराननाय नमः (om bhavishyachaturanan namah)जो भविष्य को जानने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
कुमारब्रह्मचारीॐ कुमारब्रह्मचारीणे नमः (om kumarbrahmacharine namah)जो ब्रह्मचार्य धर्म का पालन करते है, उनको मेरा नमस्कार
रत्नकुण्डलदीप्तिमानॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः (om ratnkundaldeeptimate namah)जो रत्नजड़ित कुण्डल पहनते है, उनको मेरा नमस्कार
संचल द्वाल सन्नद्ध लांब मान शिखोज्ज्व्लॐ चंचल द्वाल सन्नद्ध लांब मन शिक्खोज्ज्वाल्य नमः (om chachal dwaal sannadh laamb maan shikkhojjwal namah)जिनकी पूछ उनके सर से भी लम्बी है, उनको मेरा नमस्कार
गन्धर्व-विद्यातत्वग्यॐ गन्धर्व-विद्यातत्वग्याय नमः (om gandharv-vidyatatvgyaaynamah)जो संगीत आदि कलाओं के ज्ञाता है, उनको मेरा नमस्कार
महाबलपराक्रमॐ महाबलपराक्रमाय नमः (om mahabalpraakramaay namah)जिनमे महान बल और सामर्थ्य है, उनको मेरा नमस्कार
काराग्रहविमोक्ताॐ कराग्र्ह्विमोक्ता नमः (om karagrhvimokta namah)जो कराग्रह/कारागार से मुक्त कराने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
श्रंखलाबन्धमोचकॐ श्रंखलाबंध्नोच्काय नमः (om sharankhlabandhhmochkaay namah)जो बेड़िया तोड़ने वाले है या जो परेशानी तोड़ने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
सागरोत्तारकॐ सागरोत्तारकाय नमः (om saagarottarakaay namah)जो समुन्द्र को पार करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
प्राज्ञॐ प्राज्ञाय नमः (om praagyaay namah)जो महान विद्वान है, उनको मेरा नमस्कार
प्रतापवानॐ प्रतापवते नमः (om prataapvate namah)जो अपने पराक्रम से प्रसिद्ध है, उनको मेरा नमस्कार
महाकायॐ महाकायाय नमः (om mahaakaayay namah)जिनका शरीर विशाल है, महा का अर्थ है विशाल, काय का अर्थ है शरीर, उनको मेरा नमस्कार
परिजातद्रुमूलस्थॐ परिजातद्रुमूलस्थाय नमः (om parijaatdrumulasthaay namah)जो पारिजात वृक्ष के नीचे विराजते है, उनको मेरा नमस्कार
कपिसेनानायकॐ कपिसेनानायकाय नमः (om kapisenaanayakaay namah)जो वानर सेना के नायक है, सेनापति है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वविद्या-सम्पत्प्रदायकॐ सर्वविद्यात्प्रदायकाय नमः (om sarva vidya sampatpradaayakaay namah)जो ज्ञान और समृद्धि/संपत्ति प्रदान करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वमंत्रस्वरूपवानॐ सर्वमंत्र-स्वरूपवते नमः (om sarvswaroopvate namah)जो समस्त मंत्रो का स्वरुप है, जो सभी मंत्र विद्या में निपुण है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वतंत्रस्वरूपीॐ सर्वतंत्रस्वरूपिणे नमः (om sarvtantrswaroopine namah)जो सभी तंत्रों का स्वरुप है, जो सभी तंत्र विद्या में निपुण है, उनको मेरा नमस्कार
सर्वयंत्रात्मकॐ सर्व यंत्रात्म्काय नमः (om sarvyantraatmkaay namah)जो सभी यन्त्र विद्या में निपुण है, उनको मेरा नमस्कार
राम्सुग्रीव्संधाताॐ राम्सुग्रीव्संधात्रे नमः (om ram sugreev sandhaatre namah)जिन्होंने राम और सुग्रीव की मित्रता करवाई, उनको मेरा नमस्कार
अहिरावणमर्दनॐ अहिरावणमर्दनाय नमः (om ahiraavanmardnaay namah)जो अहिरावण का वद्ध करने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
स्फटिकाभॐ स्फटिकाभाय नमः (om sphatikaabhaay namah)जो स्फटिक पत्थर या रत्न की आभा रखते है, उनको मेरा नमस्कार
वागधीश/वागीशॐ वागधीशाय/वागीश नमः (om vaagdeeshay/vaageesh namah)जो वाणी के स्वामी है, उनको मेरा नमस्कार
नव्याकृतिपण्डितॐ नव्याकृतिपण्डिताय नमः (om navyakratipanditaay namah)जो व्याकरण में आत्यन्त कुशल एवं निपुण है, उनको मेरा नमस्कार
चतुर्बाहूॐ चतुर्बाहू नमः (om chaturbahu namah)जिनके चार भुजाएं है, उनको मेरा नमस्कार
दीनबंधुॐ दीनबन्धवे नमः (om deenbandhve namah)जो दीन-बंधुओ के मित्र है, जो असहाय लोगो के मित्र है, उनको मेरा नमस्कार
महात्माहनुमान जी के 108 नाम सिर्फ किसी शास्त्र या किताब की पर्ची नहीं बल्कि यह नाम हर उस इंसान की आवाज़ है जो कभी टूटा है, थका है, डरा है या अकेला महसूस करता है।
भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः (om bhaktavatsalaay namah)जो अपने भक्तों के प्रति स्नेही/भक्तो से प्रेम करते है, उनको मेरा नमस्कार
शुचीॐ शुचये नमः (om shuchye namah)जो परम पवित्र है, जो अंतर्मन से भी शुद्ध है, उनको मेरा नमस्कार
वाग्मीॐ वाग्मिने नमः (om vaghmine namah)जो कुशल वक्ता, उपदेशक एवं कहानीकार है, उनको मेरा नमस्कार
द्रढ़व्रतॐ द्रढ़व्रताय नमः (om dranvrataay namah)जिनकी अडिगता अटूट द्रढ़ संकल्प की शक्ति को दर्शाती है, उनको मेरा नमस्कार
हरिमर्कटमर्कटॐ हरिमर्कटमरकटाय नमः (om hari markat marktaaye namah)जो वानर स्वरुप में श्री हरी के प्रिय है, उनको मेरा नमस्कार
दान्तॐ दानताय नमः (om daantaay namah)जो संयम रखने वाले है, उनको मेरा नमस्कार
प्रसन्नात्माॐ प्रसन्नात्मने नमः (om prasannatmane namah)जिनका मन सदैव प्रसन्न रहता है, आनंदित रहता है, उनको मेरा नमस्कार
शांतॐ शान्ताय नमः (om shaantaay namah)जो शांत स्वभाव वाले है, उनको मेरा नमस्कार
शत्कंठम्दाप्र्ह्तॐ शत्कंठम्दाप्र्ह्ते नमः (om shatkanthmdapraht namah)जो अहंकारी का अहंकार दूर करते है, उनको मेरा नमस्कार
योगीॐ योगिने नमः (om yogine namah)जो महान योगी है, उनको मेरा नमस्कार
रामकथालोलॐ रामकथालोलाय नमः (om ramkathalolaay namah)जो रामकथा सुनने को उत्सुक रहते है, उनको मेरा नमस्कार
वज्रदंष्ट्रॐ वज्रदंष्ट्राय नमः (om vajradanshtraay namah)जिनके दांत वज्र के समान कठोर हैं, उनको मेरा नमस्कार
वज्रनखॐ वज्रनखाय नमः (om vajranakh namah)जिनके नाखून वज्र के समान कठोर हैं, उनको मेरा नमस्कार
रुद्रवीर्यसमुद्रवॐ रुद्रवीर्यसमुद्रव नमः (om rudraveerysamudrav namah)जो भगवान शिव के तेज से उत्पन्न हैं, जो शिवजी के 11वें रुद्रावतार हैं, उनको मेरा नमस्कार
इंद्रजित प्रहिता मोघ ब्रह्मास्त्र विनिवारकइंद्रजित प्रहिता मोघ ब्रह्मास्त्र विनिवारकाय नमः (om indrajit prahita mogh brahmastra vinivarak namah)जिन्होंने इन्द्रजीत के ब्रह्मास्त्र को रोकने की क्रिया की थी, उनको मेरा नमस्कार
पार्थ-ध्वजाग्रसंवासीॐ पार्थ-ध्वजाग्रसंवासिने नमः (om parth-dhwajagransanwasi namah)जो महाभारत में अर्जुन के रथ में स्थित हैं, उनको मेरा नमस्कार
शर्पणजरभेदकॐ शर्पणजरभेदकाय नमः (om sharpanjarbhedkaay namah)जो बाणों की बाण को भेद सकते हैं, उनको मेरा नमस्कार
दश्बाहुॐ दशबाहवे नमः (om dashbahve namah)जिनके दस भुजाएं हैं, उनको मेरा नमस्कार
लोकपूज्यॐ लोकपूज्याय नमः (om lokpujyaaye namah)जो सभी लोकों में पूजे जाते हैं, उनको मेरा नमस्कार
जाम्बवतप्रीतिवर्धनॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धन नमः (om jaambvatpreetivardhanaaye namah)जो जाम्बवंत जी के प्रिय हैं, उनको मेरा नमस्कार
सीता समेत श्रीराम पद सेवा धुरंधरॐ सीता समेत श्री राम पद सेवा धुरंधराय नमः (om seeta samet shreeram padsevadhurandhraay namah)जो सीता सहित श्री राम जी के चरणों की सेवा में निपुण हैं, उनको मेरा नमस्कार
सिंघिकाप्राणभणजनॐ सिन्घिकप्राणभंजन नमः (om simikapranbhanjanaya namah)जो सिंघिका राक्षसी का वध करने वाले हैं, उनको मेरा नमस्कार
लंकिनिभंजनॐ लंकिनिभंजनाय नमः (om lankinibanjhnaaye namah)जो लंका की द्वार रक्षिका लंकिनी को परास्त करने वाले हैं, उनको मेरा नमस्कार
कामरुपीॐ कामरूपिने नमः (om kaampurine namah)जो इच्छानुसार रूप बदल सकते हैं, उनको मेरा नमस्कार
पिन्गलाक्षॐ पिन्ग्लाक्ष्याय नमः (om pinglaakshyaay namah)जिनकी आँखें लाल-भूरी हैं, उन्हें मेरा नमस्कार
वर्धिमानाक्पुजितॐ वर्धिमानाक्पुजिताय नमः (om vardhimanakpujitaaya namah)जो समुद्र व मौनाक द्वारा पूजित हैं, उनको मेरा नमस्कार
कवलिकृत मार्तन्डामंडलॐ कवलिकृत मार्तंडामंडलाय नमः (om kavilikrut martin mandalay namah)जो सूर्य को निगलने वाले थे, उनको मेरा नमस्कार
महाकायॐ महाकाय नमः (om mahakaay namah)जो विशालकाय हैं, उनको मेरा नमस्कार
तेजस्वीॐ महाद्युताये नमः (om mahadyutaaye namah)जो अत्यंत तेजस्वी हैं, उनको मेरा नमस्कार
सिन्घनाद्स्वनप्रदायॐ सिन्घ्नादास्वन्प्रदाय नमः (om singhanadswapradaya namah)जिनकी गर्जना शेर के समान है, उनको मेरा नमस्कार
सुरार्चितॐ सुरार्चिताय नमः (om surarchitaay namah)जो देवताओं द्वारा पूजित हैं, उनको मेरा नमस्कार
दैत्यकुलान्तकॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः (om daityakulaantkaay namah)जो राक्षसों का नाश करते हैं, उनको मेरा नमस्कार
दैत्याकार्यविद्यात्कदैत्याकार्यविद्यात्काय नमः (om daityakaryavidyatak namah)जो दैत्यों की योजनाओं को विफल करते हैं, उनको मेरा नमस्कार
श्रीमानॐ श्रीमते नमः (om shreemate namah)जो सम्माननीय एवं पूजनीय हैं, उनको मेरा नमस्कार
राम्कथाप्रियॐ राम्कथ्प्रियाय नमः (om ramkathapriyaay namah)जो रामकथा सुनने को हमेशा उत्सुक रहते हैं, उनको मेरा नमस्कार
श्रीरामभक्तिरसिकॐ श्रीरामभक्तिरसिक नमः (om rambhaktirasik namah)जो श्री राम की भक्ति में लीन हैं, उनको मेरा नमस्कार
योगनिष्ठॐ योगनिष्ठाय नमः (om yognishthaay namah)जो योग साधना में लीन हैं, उनको मेरा नमस्कार
बुद्धिमानॐ बुधिमानाय नमः (om buddhimaanay namah)जो अत्यंत बुद्धिमान हैं, उनको मेरा नमस्कार
वीरहनुमानॐ वीरहनुमते नमः (om veer hanumate namah)जो पराक्रमी वीर हैं, उनको मेरा नमस्कार
रामसखाॐ राम्सखाय नमः (om raamsakhaay namah)जो श्री राम के सखा हैं, उनको मेरा नमस्कार
भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः (om bhaktvatsalaay namah)जो अपने भक्तों पर अत्यंत कृपा करते हैं, उनको मेरा नमस्कार
श्री हनुमतेॐ हनु हनुमतये नमः (om hanu hanumatye namah)जो सम्पूर्ण शक्ति, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं, उनको मेरा नमस्कार

 

हनुमान जी के 108 नाम जाप करने का समय/दिन

हनुमान जी के 108 नाम

  • मंगलवार और शनिवार हनुमान जी को अत्यंत प्रिय वार है आप इस दिन 108 नाम जाप कर सकते है|
  • सुबह स्नान करके ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर में पूजा अर्चना कीजिये|
  • इसके बाद एक चौकी रखिये चौकी पर लाल या सिन्दूरी रंग का कपडा बिछाएं|
  • हनुमान जी कोई तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर रखिये|
  • अब एक आसन बिछाएं और बेठिये|
  • 108 नाम जाप क लिए तुलसी मोती माला लीजिये अगर माला नही है तो मन में गिनती करते हुए 108 माला जाप कीजिये|
  • 108 माला जाप के बाद , बूंदी के लड्डू अथवा गुड़-चना का भोग लगाए|
  • उसके बाद प्रसाद वितरण कीजिये|

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निष्कर्ष

हनुमान जी के 108 नाम सिर्फ किसी शास्त्र या किताब की संक्या नही – यह नाम हर उस इंसान की आवाज़ है जो कभी टूटा है,थका है, डरा है या अकेलापन महसूस करता है|

इन्ही नामो में हनुमान की कई रूप है जेसे – कभी वो माता अंजनी के पुत्र हैं, कभी वो श्री राम के परम भक्त है, कभी वो लंका को जलाने वाले वानर है आदि|

यह 108 नाम सिर्फ नाम नहीं यह हमारे जीवन को मार्गदर्शन है, इन नामों का जाप करने से हमारी अंतर-आत्मा को शान्ति मिलती है हम अन्दर से सकारात्मक सोचने लगते हैं , हनुमान जी को हम ज्ञान, बल, सेवा इन तीन महत्वपूर्ण कारणों से जानते है|

हनुमान जी बहुत तेज़ बुद्धि वाले भगवान है उनकी सेवा-भाव को हम बोहत पुराने समय से सुनते आ रहे है| हनुमान जी भक्ति का सच्चा चेहरा है, श्री राम के सभी काम उन्होंने पुरे किये है|

इसलिए हनुमान चालीसा में भी कहा गया हैं “रामचंद्र के काज सवारे” हनुमान जी की भक्ति जो भी करता , वह अपने भक्तों के ऊपर कृपा करते हैं और उनकी सारी चिंता, दुःख, अन्य परशानियाँ हर लेते है, और उन्हें सुख समृद्धि प्रदान करते हैं|

हनुमान जी के 108 नाम सिर्फ नाम नहीं हैं, वह हमारे अन्दर एक नयी उम्मीद लाते हैं| हमे निरंतर उनका जाप करना चाहिए, यह हमारे लिए एक नया दरवाज़ा खोलती है, हम सकारात्मक सोच और शुद्ध मनन से आगे जीवन में बढ़ते हैं|

Table Of Content

Frequently Asked Questions

क्या 108 नाम का जाप मंगवार को करें या शनिवार को?

दोनों ही दिन सर्वश्रेष्ठ है, मंगलवार हनुमान जी का दिन माना जाता हैं और शनिवार उनके भक्तों की सुरक्षा, और शनि दोष से मुक्ति के लिए माना जाता हैं, जिस दिन मन से जाप करो वही सर्वश्रेष्ठ दिन है|

क्या माला ज़रूरी है जाप के लिए?

नहीं, माला ज़रूरी नही हैं, अगर आपके पास है तो अच्छा हैं, नही तो आप अपने मन में गिनती करके भी 108 नाम जाप कर सकते हैं|

क्या जाप सुबह ही करना ज़रूरी हैं?

नहीं, ऐसा ज़रूरी नहीं है, आप इसे शाम को भि कर सकते स्नान करके हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर आसन बिछाकर उसपे बैठके जाप शुरू कर सकते हैं|

हर जाप में ॐ बोलना ज़रूरी क्यों होता है?

किसी भी मंत्र में ॐ का बहुत महत्व होता हैं। ॐ बोलने से हमारी ऊर्जा का स्त्रोत बढ़ता हैं और हमें भक्ति, शक्ति, और ऊर्जा का स्त्रोत मिलता है।

जाप के बाद क्या करना चाहिए?

जाप पूरा होने के बाद आप हनुमान जी से प्रार्थना करके उनसे अपनी इच्छा पूर्ति की कामना कर सकते हैं। उसके बाद उन्हें भोग लगाए।

हनुमान जी को सबसे प्रिय प्रसाद क्या लगता हैं?

गुड़ और चना हनुमान जी को सबसे ज्यादा पसंद है। आप हर मंगलवार और शनिवार को उन्हें इसका भोग लगा सकते हैं।

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