मलमास 2025: मलमास/खरमास आते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आख़िर यह महीना होता क्या है। मलमास को हिन्दू धर्म में एक ऐसा समय कहा गया है जो पूरी तरह भक्ति, पूजा जैसे अच्छे कर्मों के लिए रखा जाता है।
माना जाता है कि इस महीने में नए काम, शादी, गृह प्रवेश जेसे मांगलिक कार्यो के साथ नए कपड़े, वाहन या मकान खरीदने जैसा कोई बड़ा फैसला नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह समय दान-पूर्ण करने और भगवान की ओर ध्यान देने का माना गया है।

लोग यह भी मानते हैं कि मलमास में की गई भक्ति जल्दी स्वीकार होती है और भगवान बहुत आसानी से प्रसन्न होते हैं, इसलिए यह समय आत्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में किया गया छोटा-सा दान, जप, साधारण प्रार्थना या किसी की मदद भी बहुत ज्यादा शुभ फल देती है।
इस ब्लॉग में आप बहुत आसान भाषा में जानेंगे कि मलमास क्या होता है, मलमास 2025 कब शुरू होगा, इसमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और यह महीना हमारे जीवन में कौन-कौन से अच्छे प्रभाव छोड़ता है। यह पूरा लेख आपको मलमास की बातें बिना किसी कठिनाई के समझेंगे।
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2025 में दो बार मलमास (खरमास) लगेगा, पहला 14 मार्च 2024 से 13 अप्रैल 2025 तक और दूसरा 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक।
नोट: मलमास की तारीख और समय जगह के हिसाब से थोड़ा बदल सकते हैं। सही पूजा और व्रत के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित से पुष्टि कर लें।
मलमास वह महीना होता है जब सूर्य देव धनु राशि में होते हैं। इस समय सूर्य का तेज थोड़ा कम माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, मांगलिक और शुभ काम जैसे शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण या नया व्यवसाय शुरू करना इस महीने में नहीं करना चाहिए।
सूर्य का बलवान होना इन कार्यों के लिए जरूरी माना जाता है, इसलिए मलमास में इन्हें टालना शुभ होता है। मलमास का महीना भक्ति और धार्मिक कर्मों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस समय भगवान शिव की पूजा करना, दान देना, भजन और जप करना अत्यंत लाभकारी होता है।

छोटे-छोटे अच्छे काम जैसे दीन की मदद करना, मंदिर में सेवा करना या घर में दीप जलाना भी इस महीने में बहुत फल देते हैं।
लोग मानते हैं कि मलमास में किए गए दान, भजन और पूजा से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। इससे घर में शांति आती है, मन शांत रहता है और जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
मलमास हमें यह भी सिखाता है कि रोज़ की भागदौड़ में थोड़ा रुककर भगवान को याद करना और अच्छे कर्म करना कितना ज़रूरी है। यह महीना साधना और भक्ति के लिए विशेष अवसर देता है, जिससे जीवन में लाभ मिलता है।
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यह महीना भगवान की भक्ति, पूजा और अच्छे कामों के लिए बहुत खास माना जाता है। इस महीने में किए गए व्रत, दान और पूजा बहुत फल देते हैं।

यह समय हमारे मन को शांत करने, भगवान को याद करने और जीवन में खुशियाँ और समृद्धि लाने का अवसर है।
मलमास में ये व्रत और पूजा करने से मन शांत होता है, भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति बढ़ती है।
छोटे-छोटे अच्छे काम भी इस महीने में बहुत फल देते हैं। यह समय हमें सिखाता है कि थोड़ा रुककर भगवान को याद करना और भक्ति करना कितना जरूरी है।
मलमास का महीना खास होता है। यह समय बड़े काम, योजना और व्यावसायिक शुरुआत के लिए नहीं होता। इसे भक्ति, साधना और अच्छे कर्मों का महीना माना जाता है।

इस महीने में कुछ कामों से बचना चाहिए, ताकि परेशानी और अशुभता न आए:
मलमास में छोटे-छोटे और धार्मिक काम करना बहुत शुभ होता है:
इन आसान उपायों से मन शांत होता है, घर में सुख और शांति बढ़ती है और भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। मलमास हमें यह सिखाता है कि छोटे-छोटे काम भी बहुत पुण्य ला सकते हैं।
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बहुत समय पहले की बात है। एक राजा था, जो बहुत संपन्न और शक्तिशाली था। उसने सुना कि मलमास के महीने में भगवान की भक्ति और दान करने का फल बहुत बढ़ जाता है।
राजा ने तय किया कि वह इस महीने में विशेष पूजा करेगा और गरीबों को दान देगा। उसने अपने राजमहल में कई भिक्षुओं को आमंत्रित किया और उनके लिए भोजन, वस्त्र और अनाज का इंतजाम किया।
भिक्षु राजा की भक्ति देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि भगवान को सबसे प्रिय वही काम है जो सच्चे मन और भक्ति से किया जाए।
राजा ने भी समझा कि केवल धन देना ही पुण्य नहीं होता, बल्कि सच्चे मन से सेवा और भक्ति करना सबसे बड़ा पुण्य है।
मलमास के इस महीने में राजा ने रोज भगवान की पूजा की, भिक्षुओं और गरीबों की सेवा की। इससे उसके राज्य में शांति और खुशहाली बढ़ी और राजा के मन को भी शांति और संतोष मिला।
सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि मलमास में छोटे या बड़े, दोनों तरह के अच्छे काम पुण्य लाते हैं। दान, सेवा और भगवान की भक्ति करना सबसे बड़ा पुण्य है, और इससे मन में शांति और घर में सुख-शांति आती है।
मलमास एक बहुत ही खास और पवित्र महीना है। यह समय केवल पूजा, भक्ति और अच्छे कर्म करने के लिए नहीं, बल्कि मन को शांत करने, संयम रखने और जीवन को सही दिशा देने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
इस महीने में किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य, जैसे गरीबों की मदद करना, दान देना, भजन-कीर्तन करना और भगवान की साधना करना, हमारे जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।
मलमास यह सिखाता है कि भक्ति और अच्छे कर्म करने के लिए धन या बड़े काम की जरूरत नहीं होती; सिर्फ सच्चे मन से किए गए काम ही सबसे मूल्यवान हैं।
इस ब्लॉग में हमने जाना कि मलमास 2025 कब शुरू होगा, इसका महत्व क्या है, इसमें कौन-कौन से पुण्य और धार्मिक काम किए जा सकते हैं। अर्थात मलमास हमें याद दिलाता है कि भक्ति और अच्छे कर्म हमेशा हमारे जीवन को खुशहाल और संतुलित बनाते हैं।
Table Of Content
मलमास 2025 16 दिसंबर से शुरू होकर 14 जनवरी को खत्म होगा। यह पूरा समय भक्ति और पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
इस महीने शादी, गृह प्रवेश, नया घर लेना, नया व्यवसाय शुरू करना, नामकरण और बड़े फैसले नहीं किए जाते। इन्हें शुभ नहीं माना जाता।
इस समय पूजा, दान, जप, भजन, व्रत, जरूरतमंदों की मदद, सत्संग, मंदिर दर्शन और धार्मिक साधना सबसे शुभ माने जाते हैं।
जरूरत हो तो यात्रा की जा सकती है, लेकिन शुभ कामों के लिए की जाने वाली यात्रा आमतौर पर रोक दी जाती है।
आप सरल तरीके से सोमवार व्रत, मंगलवार व्रत, शुक्रवार व्रत या एकादशी व्रत रख सकते हैं। इसमें हल्का भोजन, जप और भगवान की पूजा की जाती है।
क्योंकि इस महीने किया गया दान कई गुना फल देता है, और माना जाता है कि इस समय भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं।
नहीं। मलमास बहुत पवित्र महीना है। बस इसमें शुभ काम नहीं किए जाते, लेकिन भक्ति और अच्छे काम बहुत शुभ माने जाते हैं।
हाँ, पूजा-पाठ से जुड़ा कोई भी काम जैसे पूजा घर बनाना, साफ-सफाई, नया भगवान का फोटो या दीपक लाना पूरी तरह शुभ है।