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Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti Lyrics: बृहस्पति देव की आरती

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated March 27, 2026
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बृहस्पति देव की आरती का जाप भगवान बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान बृहस्पति को सभी देवताओं का गुरु माना जाता है

बृहस्पति भगवान की पूजा करने तथा बृहस्पति देव आरती के लिए सबसे शुभ दिन गुरूवार माना जाता है। कहा जाता है कि जो भी भक्त गुरूवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा या बृहस्पति देव की आरती का जाप करता है।

उसके सभी कष्ट दूर हो जाते है। गुरूवार के दिन व्रत करते समय बृहस्पति देव की आरती करने का विधान माना जाता है। तो आइये पढ़ते है इस आरती को।

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बृहस्पति देव जी की आरती – Brihaspati Dev Aarti Lyrics In Hindi

|| बृहस्पति देव आरती ||

जय बृहस्पति देवा,
ऊँ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगा‌ऊँ,
कदली फल मेवा ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर,
तुम सबके स्वामी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल,
सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक,
कृपा करो भर्ता ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर,
जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर,
आकर द्घार खड़े ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि,
भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता,
भव बंधन हारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक,
सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटा‌ओ,
संतन सुखकारी ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

जो को‌ई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर,
सो निश्चय पावे ॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।
बोलो बृहस्पति देव भगवान की जय ॥

Brihaspati Dev Ji Ki Aarti Lyrics In English – ऊँ जय बृहस्पति देवा आरती

|| Brihaspati Dev Aarti ||

Jai Brihaspati Deva,
Om Jai Brihaspati Deva.
Chin chin Bhog Lagaun,
Kadali phal meva.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Tum Poorn Paramatma,
Tum Antaryaami.
Jagatpita Jagadishwar,
Tum sabke swami.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Charanamrit nij nirmal,
Sab paatak harta.
Sakal manorath daayak,
Kripa karo bharta.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Tan, man, dhan arpan kar,
Jo jan sharan pade.
Prabhu prakat tab hokar,
Aakar dhaar khade.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Deendayal Dayanidhi,
Bhaktan hitkari.
Paap dosh sab harta,
Bhav bandhan haari.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Sakal manorath daayak,
Sab Sanshay Haaro.
Vishay vikaar mitao,
Santan Sukhakari.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Jo koi aarti teri,
Prem sahit gaave.
Jethanand Aanandkar,
So nishchay paave.

Om Jai Brihaspati Deva,
Jai Brihaspati Deva.

Sab bolo Vishnu Bhagwan ki Jai.
Bolo Brihaspati Dev Bhagwan ki Jai.

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निष्कर्ष

बृहस्पति देव की आरती “ऊँ जय बृहस्पति देवा” एक बहुत ही पवित्र और फलदायी आरती है। भगवान बृहस्पति को सभी देवताओं का गुरु माना जाता है और उनकी कृपा से जीवन में ज्ञान, धन, सुख और समृद्धि आती है

हर गुरुवार को सच्चे मन से यह आरती करने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं हट जाती हैं।

99Pandit की हमेशा यही कोशिश है कि आपकी हर पूजा सही विधि और पूरी श्रद्धा के साथ हो। अगर आप घर पर बृहस्पति पूजा या कोई अन्य अनुष्ठान विधिवत करवाना चाहते हैं तो 99Pandit पर अनुभवी और वेरिफाइड पंडित जी बुक करें

Table Of Content

Frequently Asked Questions

भगवान बृहस्पति कौन हैं?

भगवान बृहस्पति को हिन्दू धर्म में देवताओं के गुरु के रूप में जाना जाता है। वे ज्ञान, विद्या, बुद्धि और धर्म के देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को नवग्रहों में से एक माना जाता है और इनका प्रभाव व्यक्ति की शिक्षा, विवाह, संतान और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

बृहस्पति देव की आरती कब करनी चाहिए?

बृहस्पति देव की आरती करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके, पीले वस्त्र पहनकर और पीले फूल चढ़ाकर भगवान बृहस्पति की पूजा और आरती करनी चाहिए।

बृहस्पति देव की आरती करने से क्या फायदा होता है?

भगवान बृहस्पति की आरती करने से मन में शांति आती है, ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमज़ोर है उनके लिए यह आरती विशेष रूप से लाभदायक है।

क्या बृहस्पति देव जी की आरती रोज़ कर सकते हैं?

हाँ, बृहस्पति देव जी की आरती रोज़ की जा सकती है। इसमें कोई मनाही नहीं है। हालांकि गुरुवार के दिन यह आरती करना विशेष रूप से फलदायी होता है। जो लोग रोज़ नहीं कर सकते वे कम से कम हर गुरुवार को ज़रूर करें।


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