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Jay Jay Janak Sunandini Lyrics in Hindi | दधिमती माता की स्तुति

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated March 19, 2026
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माँ दधिमती देवी दाधीच ब्राह्मण समाज की कुलदेवी हैं और राजस्थान के गोठ-मांगलोद में उनका प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। माँ दधिमती को भगवान विष्णु की प्रिया और आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है

वे अपने भक्तों के सभी कष्ट हरती हैं, दुश्मनों से रक्षा करती हैं और हर मनोकामना पूरी करती हैं।
जय जय जनक सुनन्दिनी” दधिमती माता की स्तुति उनकी सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्तुतियों में से एक है।

इस स्तुति में माँ के आठ अलग-अलग रूपों का गुणगान किया गया है इसीलिए इसे “दधिमती अष्टापदी” भी कहा जाता है। यह स्तुति माँ दधिमती को बहुत प्रिय है और इसे पढ़ने या सुनने मात्र से माँ की कृपा मिलती है।

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दधिमती माता की स्तुति हिंदी में – Jay Jay Janak Sunandini Lyrics in Hindi

|| दधिमती माता स्तुति ||

जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे,
दुष्ट निकंदिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

सकल मनोरथ दायनी, जग सोहिनी हे,
पशुपति मोहिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

विकट निशाचर कुंथिनी, दधिमंथिनी हे,
त्रिभुवन ग्रंथिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

दिवानाथ सम भासिनी, मुख हासिनि हे,
मरुधर वासिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

जगदंबे जय कारिणी, खल हारिणी हे,
मृगरिपुचारिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

पिपलाद मुनि पालिनी, वपु शालिनी हे,
खल खलदायनी मात जय जय विष्णु प्रिये।।

तेज – विजित सोदामिनी, हरि भामिनी हे,
अहि गज ग्रामिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

घरणीधर सुसहायिनी, श्रुति गायिनी हे,
वांछित दायिनी मात जय जय विष्णु प्रिये।।

जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे,
दुष्ट निकंदिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये।।

Jay Jay Janak Sunandini Lyrics in English – जय जय जनक सुनन्दिनी

|| Jay Jay Janak Sunandini ||

Jai Jai Janak Sunandini, Hari Vandini He,
Dusht Nikandini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Sakal Manorath Dayini, Jag Sohini He,
Pashupati Mohini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Vikat Nishachar Kunthini, Dadhimanthini He,
Tribhuvan Granthini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Divanath Sam Bhasini, Mukh Hasini He,
Marudhar Vasini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Jagdambe Jai Karini, Khal Harini He,
Mrigaripucharini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Pipalad Muni Palini, Vapu Shalini He,
Khal Khaldayini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Tej Vijit Sodamini, Hari Bhamini He,
Ahi Gaj Gramini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Gharanidhar Susahayini, Shruti Gayini He,
Vanchhit Dayini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

Jai Jai Janak Sunandini, Hari Vandini He,
Dusht Nikandini Maat, Jai Jai Vishnu Priye।।

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निष्कर्ष

दधिमती माता स्तुति “जय जय जनक सुनन्दिनी” सिर्फ स्तुति नहीं हैं, यह उन लाखों भक्तों की आस्था और श्रद्धा की आवाज़ है जो सदियों से माँ दधिमती के चरणों में अपना सिर झुकाते आए हैं।

माँ दधिमती आदिशक्ति का वह रूप है जो अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करती। जो कोई भी सच्चे मन से इस स्तुति का पाठ करता है, माँ उसकी हर परेशानी दूर करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

चाहे आप गोठ-मांगलोद के मंदिर में जाकर दर्शन करें या घर बैठकर यह स्तुति पढ़ें, माँ दधिमती की कृपा हर जगह बराबर मिलती है।

नवरात्रि में, चैत्र पूर्णिमा पर और हर शुक्रवार को इस स्तुति का पाठ करना आपके जीवन को बेहतर बना सकता है।

Table Of Content

Frequently Asked Questions

माँ दधिमती कौन हैं?

माँ दधिमती आदिशक्ति का एक दिव्य स्वरूप हैं और दाधीच ब्राह्मण समाज की कुलदेवी हैं। उनका सबसे प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के नागौर जिले में गोठ-मांगलोद नामक गाँव में है। मान्यता है कि माँ दधिमती भगवान विष्णु की प्रिया हैं और महर्षि दधीचि की बहन हैं।

"जय जय जनक सुनन्दिनी" स्तुति का क्या अर्थ है?

"जय जय जनक सुनन्दिनी" का सरल अर्थ है - "हे माँ, जो जनक की पुत्री के समान आनंद देने वाली हैं, जो भगवान हरि की वंदना करती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं, आपकी जय हो।" इस स्तुति में माँ दधिमती के आठ अलग-अलग गुणों और रूपों का वर्णन है।

दधिमती माता स्तुति कब पढ़नी चाहिए?

नवरात्रि में, चैत्र और आश्विन माह में तथा शुक्रवार के दिन इस स्तुति का पाठ करना विशेष रूप से शुभ होता है। माघ शुक्ल अष्टमी को माँ दधिमती का प्राकट्य दिवस माना जाता है, इस दिन पाठ करना बहुत फलदायी होता है।

दधिमती माता स्तुति पढ़ने से क्या फायदा होता है?

मान्यता है कि सच्चे मन से इस स्तुति का पाठ करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।


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