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Sita Ji Aarti Lyrics in Hindi: सीता माता आरती हिंदी में

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated March 24, 2026
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सीता माता आरती का जाप माता जानकी की कृपा पाने तथा उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| माना जाता है कि जानकी माता की पूर्ण श्रद्धा से पूजा – अर्चना करने से सीता माता की अपार कृपा प्राप्त होती है|

माँ सीता की पूजा करते समय सीता माता आरती का जप करना बहुत ही आवश्यक माना जाता है| बिना आरती का जाप किये सीता माता की पूजा भी अधूरी मानी जाती है| हिन्दू धर्म में सीता माता को भगवान श्री राम जी धर्मपत्नी के रूप में जाना जाता है|

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सीता माता जी की आरती – Sita Mata Aarti Lyrics in Hindi

|| सीता माता आरती ||

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

Sita Ji Ki Aarti Lyrics In English – आरती श्री जनक दुलारी की

|| Sita Mata Aarti ||

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Jagat Janani Jag Ki Vistarin,
Nitya Satya Saaket Vihaarini,
Param Dayamayi Dinodharini,
Sita Maiya Bhakton Hitkaari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Sati Shromani Pati Hit Kaarini,
Pati Seva Vitta Van Charini,
Pati Hit Pati Viyog Sveekaarini,
Tyag Dharma Moorti Dhari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

Vimal Kirti Sab Lokan Chhaai,
Naam Let Pavan Mati Aayi,
Sumirat Kaatat Kasht Dukh Daai,
Sharanagat Jan Bhay Hari Ki.

Aarti Shri Janak Dulari Ki,
Sita Ji Raghuvar Pyari Ki.

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निष्कर्ष

हम अक्सर सीता माता को सिर्फ “राम जी की पत्नी” के रूप में जानते हैं। लेकिन ज़रा सोचिए एक राजकुमारी जिसने राजमहल छोड़कर वनवास में जाना स्वीकार किया।

रावण की लंका में अकेले बंदी रहीं लेकिन एक बार भी रावण के सामने झुकीं नहीं। वापस आने के बाद भी जब समाज ने सवाल उठाए तब भी उन्होंने अपना धर्म नहीं छोड़ा।

सीता माता कमज़ोर नहीं थीं बल्कि वे इस पूरी कथा की सबसे मज़बूत पात्र थीं। “आरती श्री जनक दुलारी की” सिर्फ एक आरती नहीं है।

यह उस शक्ति को नमन है जो हर परिस्थिति में धर्म पर टिकी रही, जो धरती माता की पुत्री थी और जो आज भी करोड़ों घरों में माँ, बेटी और पत्नी के रूप में पूजी जाती है।

जो भी इस आरती को सच्चे मन से पढ़ता है, माँ जानकी उसके घर में सुख, शांति और धर्म का आशीर्वाद लेकर आती हैं। 99Pandit की हमेशा यही कोशिश है कि आपकी हर पूजा सही विधि और पूरी श्रद्धा से हो।

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Frequently Asked Questions

सीता माता को "जनक दुलारी" क्यों कहते हैं?

"जनक दुलारी" का मतलब है - राजा जनक की प्रिय पुत्री। लेकिन सीता माता का जन्म किसी माँ की कोख से नहीं हुआ था। जब राजा जनक अपने खेत में हल चला रहे थे तब धरती से एक सोने की पेटी निकली जिसमें एक सुंदर बालिका थी। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया। इसीलिए सीता माता को "जनक दुलारी" और "धरती माता की पुत्री" भी कहा जाता है।

सीता माता की आरती करने से क्या विशेष लाभ होता है?

सीता माता को सुहाग, सौभाग्य और गृह-सुख की देवी माना जाता है। मान्यता है कि जो सुहागिन स्त्रियाँ सच्चे मन से सीता माता की आरती करती हैं उनके दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सुख-शांति बनी रहती है।

सीता माता की आरती कब करनी चाहिए?

सीता माता की आरती किसी भी दिन की जा सकती है लेकिन बुधवार और शुक्रवार को यह आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

क्या सीता माता की आरती अकेले राम जी की पूजा किए बिना की जा सकती है?

हिन्दू धर्म में सीता और राम को हमेशा एक साथ पूजा जाता है जैसे "सीताराम" एक ही नाम है। आरती के बोल भी यही कहते हैं "सीता जी रघुवर प्यारी की।" इसलिए आदर्श रूप से सीता माता की पूजा और आरती राम जी के साथ ही करनी चाहिए।


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