Book Griha Pravesh Puja Online Book Griha Pravesh Puja Online Book Now

हिंदू धर्म में क्यों रखी जाती है सिर पर शिखा या चोटी

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated August 21, 2023
1
Select Puja
2
Book Pandit
3
Perform Puja
4
Get Blessings
Summarize This Article With Ai - ChatGPT Perplexity Gemini Claude Grok

हिन्दू धर्म में अनेकों रीती रिवाजों को माना जाता है| सनातन धर्म में व्यक्ति के पैदा होने से लेकर उसके मरने तक के इस सफर में वह अनेकों परम्पराओं व मान्यताओं को निभाता है| जैसे कि जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसके बाल को कटवाया जाता है| जिसे मुंडन संस्कार के नाम भी जाना जाता है| इसे द्विज भी कहा जाता है| इसी प्रकार से हिन्दू धर्म में बहुत सी परम्पराएं मानी जाती है| आज हम इन्ही में से एक हिन्दू संस्कार के बारे में पूरी जानकारी बताने वाले है| तो जिस हिन्दू परंपरा की हम बात करने वाले है वो है कि सनातन धर्म में ब्राह्मणों के द्वारा सिर पर चोटी या शिखा के नाम से भी जाना जाता है| 

हिंदू धर्म में क्यों रखी जाती है सिर पर शिखा या चोटी

आपने हिन्दू धर्म में कई सारे पंडितों को चोटी रखते हुए देखा होगा| यह चोटी या शिखा को रखने की परंपरा सनातन धर्म में ऋषि – मुनियों के काल से ही चली आ रही है| जिस संस्कृति की पालना आज भी हिन्दू धर्म में सम्पूर्ण श्रद्धा के साथ की जा रही है| हिन्दुओं में चोटी को रखने के सम्बन्ध में कई सारे वैज्ञानिकों ने भी अपने – अपने पक्ष रखे है| तो हिन्दू धर्म में चोटी क्यों रखी जाती है, के बारे जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पढ़े|

हिन्दू धर्म में प्रारंभ से ही यह पांच सम्प्रदाय प्रचलन में रहे है – शैव, वैष्णव, शाक्त, वैदिक एवं स्मार्त| इनमे सभी सम्प्रदाय के अलग – अलग नियम, संस्कार और परम्पराएं होती है| लेकिन इसके पश्चात भी इन्हें दो भागों में विभाजित किया गया| पहले जो है वो समाज में संस्कार, कर्मकांड, यज्ञ और मंदिरों को सुचारू रूप से चलाने का काम करते है| तथा दूसरे वाले जो है वह साधु समाज से सम्बन्ध रखते है| यह लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की सलाह देते है| 

Book a Pandit for any Puja

Expert and trusted pandits available for every puja, ritual, ceremony, and celebration

Order Samagri
Book a Pandit

चोटी या शिखा रखने का कारण 

प्राचीन समय में पूजा – पाठ, संस्कार, हवन और कर्मकांड आदि के कार्य करवाता था,वह चोटी या शिखा रखता था| इसके अलावा जो भी धर्म, दीक्षा और शिक्षा से सम्बंधित कार्य करता था, वह दाढ़ी और जटाधारी होता था| शास्त्रों में बताया गया है कि शिखा की लम्बाई और गाय के पैरों के खुर की लम्बाई एक समान होनी चाहिए| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में किसी ब्राह्मण की चोटी या शिखा काट देना, उसे मृत्यु दंड देने के समान माना जाता था| माना जाता है कि जब वैष्णव पंथ के लोग मुंडन करवाते है तो वे चोटी रखते है| लेकिन जब शैव सम्प्रदाय के लोग जब मुंडन करवाते है तो वे चोटी नहीं रखते है| 

ऐसे तो सामान्यत: मुंडन संस्कार कई अवसरों पर करवाया जाता है| लेकिन मुख्यतः मुंडन संस्कार का कार्यक्रम बच्चों के पैदा होने पर किया जाता है| दूसरा जब किसी की मृत्यु हो जाए, उस समय मुंडन करवाया जाता है| तीसरा जब किसी तीर्थ पर गए हो और चौथा किसी पूजा के द्वारा| ऐसे तो चोटी को रखने के भी कई कारण है|

बच्चे के पैदा होने के पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें महीने में बच्चे के बाल उतरवाए जाते है| जिसे चुडाकर्म संस्कार या मुंडन संस्कार के नाम से भी जाना जाता है| चोटी को रखने का रिवाज बच्चे के मुंडन संस्कार के साथ ही किया जाता है| बच्चे का मुंडन करने के बाद जिस स्थान पर चोटी रखी जाती है| उसे स्थान को सहस्त्रार चक्र भी कहते है| धर्मो में उस जगह के, जहाँ चोटी रखी जाती है, आत्मा का स्थान माना जाता है| 

मुंडन संस्कार में बच्चे के बालों को काटकर सिर के बीच में बाल को छोड़ दिया जाता है| पंडित के द्वारा जिस स्थान के बाल छुड़वाए जाते है| शास्त्रों में बताया गया है कि उस स्थान के 2 या 3 इंच निचे आत्मा का स्थान है| चोटी को हमेशा ही मस्तिष्क के केंद्र पर रखा जाता है| वैज्ञानिकों के अनुसार इस स्थान से शरीर के प्रत्येक अंगों, मन और बुद्धि का सम्पूर्ण नियंत्रण होता है| उनका मानना यह भी है कि जिस स्थान पर चोटी रखी जाती है| उस स्थान पर हमारे पुरे शरीर की नसे आकर मिलती है| इसका तात्पर्य यही है कि प्राचीन काल में जिस प्रथा का ऋषि मुनियों ने प्रारम्भ किया था| वह बिल्कुल उचित थी| 

शिखा या चोटी रखने के नियम   

हिन्दू धर्म में चोटी या शिखा रखने का बहुत महत्व बताया गया है| सनातन धर्म में सभी कार्य को करने का कोई ना कोई नियम अवश्य होता है| प्राचीन कथाओं के अनुसार चोटी रखने के लिए भी कुछ नियमों की पालना करना बहुत ही आवश्यक है| जब भी कोई व्यक्ति चोटी रखे तो उसको अपने सारे बालों को काटना चाहिए| उसके बाद मस्तिष्क के बीचो बीच ही चोटी को रखा जाना चाहिए| हिन्दू धर्मग्रंथों में चोटी को गाय के खुर के समान दर्शाया गया है| इसका तात्पर्य यह है कि चोटी की जो लम्बाई है वो गाय के पैरों के खुर की लम्बाई के समान होनी चाहिए|

शिखा या चोटी रखने के नियम   

इसी के साथ ही जब आप किसी भी प्रकार का दान धर्म, पूजा, भोजन आदि ऐसे सभी काम करते समय अपनी चोटी को गाँठ बाँध कर रखना चाहिए| इसके अलावा अन्य सभी कार्य करते समय आप  चोटी को मुक्त करके रख सकते है| यदि आप चोटी रखते है तो आपको उसी के साथ अपने व्यवहार को भी अच्छा रखना होगा| अपने व्यवहार को अच्छा रखने व किसी भी अन्य व्यक्ति के प्रति इर्ष्या की भावना को त्याग कर सब के लिए अच्छी सोच रखनी होगी| स्वयं से बड़े व्यक्तियों का हमेशा आदर करे और छोटों को प्रेम करें|   

Book a Pandit for any Puja

Expert and trusted pandits available for every puja, ritual, ceremony, and celebration

Order Samagri
Book a Pandit

चोटी रखने के क्या लाभ हैं? 

सनातन धर्म में चोटी रखना बहुत ही फायदेमंद बताया गया है| यहाँ तक की ज्योतिष और विज्ञान में भी चोटी रखने के बहुत ही ज्यादा फायदे बताये गए है| आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको चोटी रखने के समस्त लाभों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे| इसलिए हमारे इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढियेगा| 

  • हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार हमारे सिर के बालों का सीधा सम्बन्ध हमारे शरीर में उपस्थित सभी नाडियों और संधियों से होता है| हिन्दू धर्म के ही एक ग्रंथ सुश्रुत सहिंता में चोटी वाले स्थान को अधिपतिमर्म के नाम से भी जाना जाता है| अधिपतिमर्म को हमारे शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा माना गया है| यदि किसी भी गलती के कारण हमारे इस भाग पर चोट लग जाती है तो इससे हमारी मृत्यु भी हो सकती है| चोटी रखने से इसका खतरा कम हो जाता है| 
  • चोटी रखने से मनुष्य को मृत्यु के बाद जल्दी मोक्ष की प्राप्ति होती है| लेकिन इसी के साथ ही मनुष्य को अपने कर्मों को अच्छा रखना चाहिए| क्योंकि जब तक मनुष्य अपने कर्मों को अच्छा नहीं करेगा तब तक उसके लिए मोक्ष के द्वार बंद ही रहेंगे| 
  • मनुष्य को अपने जीवन काल में चोटी अवश्य रखनी चाहिए| ऐसा करने से व्यक्ति का दिमाग शांत रहता है| और मन के चल रही सभी चिंताओं से मुक्ति भी मिलती है| शास्त्रों में बताया गया है कि पढाई कर रहे सभी बच्चों को चोटी रखना चाहिए| इससे बच्चो की बुद्धि में बहुत ही तेजी से विकास होगा| 
  • शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि मनुष्य के भीतर सात चक्र होते है| चोटी रखने से वह सातों चक्र जागृत होते है| इसके जागृत होने से मनुष्य के जीवन से सभी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है|  
  • हिन्दू धर्मग्रंथों में मान्यता है कि चोटी या शिखा रखने वाले को कभी भी चोटी को खुला नहीं रखना चाहिए| हमेशा चोटी को बांध कर ही रखना चाहिए| चोटी को बाँधने ने सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं हमसे दूर रहती है और गाँठ बाँधने से चोटी अपनी जगह पर स्थिर भी बनी रहती है| 

शिखा रखने के वैज्ञानिक लाभ 

हमने शास्त्रों के अनुसार तो यह जान लिया है कि चोटी या शिखा रखना से हमे किस प्रकार लाभ है| अब हम इस नए दौर के वैज्ञानिकों के माध्यम से भी जानेंगे कि शिखा रखने से हमें कितना लाभ है| तो आइये कुछ वैज्ञानिक कारणों से जानते है कि चोटी रखने से हमे किस प्रकार लाभ है| मनुष्य के सिर के पिछले भाग को संस्कृत भाषा में मेरुशीर्ष के नाम से जाना जाता है| यह व्यक्ति के शरीर का सबसे संवेदनशील भाग है| जहा पर मेरुदंड की सभी शिराएँ आकर जुडती है| प्राचीन कथाओं के अनुसार मनुष्य के शरीर में सारी ब्रह्मांडीय शक्तियों का आगमन मस्तिष्क में इस जगह से होता है| 

इस भू मध्य में आज्ञाचक्र इसी का प्रतिबिम्ब माना गया है| आज्ञा चक्र हमारे दोनों भोहों के मध्य में होता है और इसके ठीक पीछे जो मनुष्य खोपड़ी का हिस्सा होता है| इसे मेरुशीर्ष ने नाम से भी जाना जाता है| माना जाता है कि योगियों को नाद की ध्वनि भी यही से सुनाई देती है| सिर का यह भाग ग्राहक यंत्र के रूप में कार्य करता है|

इसी कारण से चोटी रखने की परंपरा बनाई गयी है, जो एक रिसीविंग एंटीना के रूप काम करता है| मेरुशीर्ष मनुष्य शरीर का सबसे संवेदनशील भाग है और चोटी धारण करने के पश्चात यह भाग ओर अधिक संवेदनशील हो जाता है| हिन्दू धर्म के अध्यात्म और योग को समझने पर प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिकों द्वारा खोज करने करने पर चोटी से सम्बंधित कई सारे महत्वपूर्ण तथ्य सामने निकलकर आये| 

वैज्ञानिकों का माना यह है कि जिस स्थान पर चोटी रखने की मान्यता है| उस स्थान पर सुषुम्ना नाडी भी पायी जाती है| इसे हम ऐसे भी बोल सकते है कि यदि मेरुशीर्ष और आज्ञाचक्र में बीचों बीच एक सीधी रेखा खिची जाए तो वही ठीक बीच में सुषुम्ना नाडी का स्थान होता है| विज्ञान के द्वारा यह बात सिद्ध है कि सुषुम्ना नाडी मनुष्य शरीर में हर तरह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं| शिखा रखने से सुषुम्ना नाड़ी की रक्षा होती है| इसके अलावा ब्रह्माण्ड से आने वाली समस्त आध्यात्मिक ऊर्जाओं को ग्रहण करती है| 

जिस स्थान पर चोटी रखी जाती है| उस जगह से शरीर के सभी अंगों, मन और बुद्धि पर काबू किया जाता है| चोटी मनुष्य के सम्पूर्ण मस्तिष्क के संतुलन को बनाए रखती है| मान्यता है कि शिखा धारण करने से मनुष्य दीर्घायु होता है| शिखा रखने से मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है और वह तेजस्वी भी होता है| यजुर्वेद ग्रंथ के अनुसार चोटी को इंद्रयोनि भी कहा जाता है| चोटी ब्रह्मरंध्र ज्ञान, इच्छा और क्रिया इन तीनों शक्तियों की त्रिवेणी है| पूजा – पाठ करते समय चोटी को गाँठ बाँधकर ही पूजा करनी चाहिए| चोटी को बाँधने से हमारे शरीर में जो ऊर्जाए संकलित होती है| वह बाहर नहीं निकलती है| 

वैज्ञानिक तौर पर ब्रह्मरंध्र की उष्णता और पीनियल ग्रंथि की संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए चोटी रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है| संध्या विधि में संध्या होने से पूर्व गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ ही चोटी को गाँठ बाँध लेने की प्रथा है| इसके पीछे भी एक संकल्प और प्रार्थना का भाव है| सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार पूजा – पाठ या साधना से पूर्व अपनी शिखा को गाँठ बांधना गायत्री मंत्र के साथ ही होता है| 

Book a Pandit for any Puja

Expert and trusted pandits available for every puja, ritual, ceremony, and celebration

Order Samagri
Book a Pandit

शिखा रखने का महत्व  

हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार हमारे सिर के बालों का सीधा सम्बन्ध हमारे शरीर में उपस्थित सभी नाडियों और संधियों से होता है| हिन्दू धर्म के ही एक ग्रंथ सुश्रुत सहिंता में चोटी वाले स्थान को अधिपतिमर्म के नाम से भी जाना जाता है| अधिपतिमर्म को हमारे शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा माना गया है| यदि किसी भी गलती के कारण हमारे इस भाग पर चोट लग जाती है तो इससे हमारी मृत्यु भी हो सकती है|

शिखा रखने का महत्व

चोटी रखने से इसका खतरा कम हो जाता है| सुषुम्ना का जो मुख्य स्थान होता है| इस स्थान को मस्तुलिंग कहते है| माना जाता है कि मस्तुलिंगंग जितने अधिक शक्तिशाली होते है| उतनी ही ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों की शक्ति भी बढती है|

मस्तिष्क को ठंडा रखने के लिए गाय के खुर के समान लम्बाई की होनी चाहिए| धार्मिक मान्यताओ के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के द्वारा अज्ञानता और फैशन के चलते नियमों का पालन किये बिना चोटी धारण करता है तो उसे इसके लाभ से ज्यादा नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है| 

निष्कर्ष 

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से हिन्दू धर्म में चोटी क्यों बाँधी जाती है,के बारे में काफी बातें जानी है| इसके अलावा हमने आपको हिन्दू धर्म में चोटी के महत्व से जुड़ी काफी बातों के बारे में बताया है| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है।

इसके अलावा भी अगर आपको मुंडन संस्कार या उसके चोटी रखने की प्रथा या अनुष्ठान या तीनो ही चीज़े करवानी है| वो भी आपकी अपनी भाषा है| तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है| अब 99Pandit लाया है, आपके लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक करने की सेवा| जो आपको किसी भी शहर में आपके लिए उचित पंडित तलाश करने का काम आसान कर देंगे| 

Table Of Content

Frequently Asked Questions

हिन्दू धर्म में शिखा क्यों रखी जाती है ?

चोटी रखने से सहस्त्रार चक्र जागृत होता है| इसको जागृत करने से मन, बुद्धि और शरीर पर नियंत्रण पाने में आसानी होती है|

शिखा में गाँठ क्यों लगाई जाती है ?

पूजा - पाठ करते समय शिखा में गाँठ लगाने का प्रावधान है| इससे मस्तिष्क में संकलित होने वाली ऊर्जा तरंगे बाहर ना जाये|

शिखा की लम्बाई कितनी होनी चाहिए ?

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार शिखा की लम्बाई गाय के पैरों के खुरो की लम्बाई के समान होनी चाहिए|


Enquire Now
Book A Pandit

Puja Services

..
Filter