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Vishwakarma Bhagwan Ki Aarti in Hindi: विश्वकर्मा जी की आरती हिंदी में

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated March 23, 2026
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विश्वकर्मा जी की आरती, भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के बाद गाई जाती है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि रावण की लंका, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान श्री कृष्ण की द्वारका नगरी तथा हस्तिनापुर नगरी का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा ही किया गया था|

भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा इस पृथ्वी पर सृष्टि के सृजन कर्ता के रूप में की जाती है| भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करने के बाद विश्वकर्मा जी की आरती अवश्य रूप से की जाती है| बिना आरती के विश्वकर्मा जी की पूजा अधूरी मानी जाती है|

जांगिड ब्राह्मण समाज के लोग विश्वकर्मा भगवान को बहुत मानते है तथा इनकी पूजा करते है| विश्वकर्मा जी की आरती का जाप करने से आपके व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी|

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विश्वकर्मा जी की आरती हिंदी में – Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

|| विश्वकर्मा जी की आरती ||

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।

श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

Vishwakarma Bhagwan Ki Aarti Lyrics in English – जय श्री विश्वकर्मा प्रभु

|| Vishwakarma Ji Ki Aarti ||

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.
Sakal srishti ke karta,
Rakshak stuti dharma.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Aadi srishti mein vidhi ko,
Shruti Updesh diya.
Jeev maatra ka jag mein,
Gyaan vikas kiya.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Rishi Angira tap se,
Shaanti nahin paayi.
Dhyaan kiya jab Prabhu ka,
Sakal siddhi aayi.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Rog Grasht raja ne,
Jab aashray liya.
Sankat mochan bankar,
Door dukhaa kina.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Jab rathakar dampati,
Tumhaari ter kari.
Sunkar deen prarthana,
Vipat sagari hari.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Ekaanan chaturaanan,
Panchanan raaje.
Tribhuj Chaturbhuj dashabhuj,
Sakal roop saaje.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Dhyaan dhare tab pad ka,
Sakal siddhi aave.
Man dvividha mit jaave,
Atal Shakti paave.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.

Shri Vishwakarma ki aarti,
Jo koi gaave.
Bhajat Gajaanand Swami,
Sukh sampati paave.

Jai Shri Vishwakarma Prabhu,
Jai Shri Vishwakarma.
Sakal srishti ke karta,
Rakshak stuti dharma

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निष्कर्ष

आज की दुनिया में हम Engineer को Engineer कहते हैं, Architect को Architect कहते हैं, Craftsman को Craftsman कहते हैं।

लेकिन हज़ारों साल पहले जब इन सब शब्दों का अस्तित्व नहीं था, तब हमारे पुरखों ने इन सब कामों को एक नाम दिया था – “भगवान विश्वकर्मा।”

जिन्होंने रावण की सोने की लंका बनाई, श्री कृष्ण की द्वारका नगरी बनाई, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी बनाई, वह कोई साधारण देव नहीं हैं। वे इस पूरी सृष्टि के पहले और सबसे महान वास्तुकार हैं

इसीलिए जब कोई इंजीनियर, कारीगर, मिस्त्री, फैक्ट्री मालिक या कोई भी व्यक्ति जो अपने हाथों से कुछ बनाता है और विश्वकर्मा जी की आरती करता है, तो वह सिर्फ पूजा नहीं कर रहा। वह अपने काम को, अपने हुनर को और अपने औज़ारों को सम्मान दे रहा है।

“जय श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई गावे, भजत गजानंद स्वामी सुख संपति पावे” – यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, यह उस हर इंसान का आशीर्वाद है जो ईमानदारी से अपना काम करता है।

Table Of Content

Frequently Asked Questions

भगवान विश्वकर्मा को "देवताओं का इंजीनियर" क्यों कहते हैं?

भगवान विश्वकर्मा ने वे सब चीज़ें बनाई जो देवताओं को, दानवों को और मनुष्यों को चाहिए थीं। रावण की सोने की लंका, श्री कृष्ण की द्वारका नगरी, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, भगवान इंद्र का अमरावती महल, भगवान शिव का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, यह सब विश्वकर्मा जी ने ही बनाए थे।

विश्वकर्मा जी की आरती पूजा के बाद ही क्यों करनी चाहिए?

आरती पूजा का अंतिम और सबसे ज़रूरी हिस्सा है। पूजा के दौरान हम भगवान को भाव, फूल, दीप और नैवेद्य अर्पित करते हैं लेकिन आरती उस पूरी पूजा को पूर्ण करती है।

क्या विश्वकर्मा जी की आरती सिर्फ विश्वकर्मा पूजा के दिन ही करनी चाहिए?

नहीं, बिल्कुल नहीं। विश्वकर्मा जी की आरती किसी भी दिन की जा सकती है। अगर आप कोई नया व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, नई दुकान खोल रहे हैं, कोई नई मशीन खरीद रहे हैं या अपने काम में तरक्की चाहते हैं तो किसी भी शुभ दिन यह आरती करें।

क्या औज़ारों और मशीनों की पूजा करना सही है?

बिल्कुल सही है और यही विश्वकर्मा पूजा की सबसे खूबसूरत बात है। हिन्दू धर्म में यह माना जाता है कि हमारे औज़ार, मशीनें और हमारे काम के साधन, ये सब हमारी रोज़ी-रोटी देते हैं। इन्हें नमस्कार करना और पूजा करना इन्हें सम्मान देना है, अंधविश्वास नहीं।


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