Jay Jay Janak Sunandini Lyrics in Hindi | दधिमती माता की स्तुति
माँ दधिमती देवी दाधीच ब्राह्मण समाज की कुलदेवी हैं और राजस्थान के गोठ-मांगलोद में उनका प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। माँ…
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दुर्गा माता की आराधना करने के लिए दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa Lyrics in Hindi) का पाठ बहुत ही श्रेष्ठ माना जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि त्यौहार के नौ दिनों में दुर्गा चालीसा नियमित तथा पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करने से शत्रुओं से छुटकारा मिलता है|
दुर्गा चालीसा का पाठ करने से भक्तों के मन की सभी इच्छाएं माता दुर्गा पूर्ण कर देती है| धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दुर्गा चालीसा का पाठ नवरात्रि के समय करना बहुत ही शुभ माना जाता है|

माँ दुर्गा के जो भी भक्त नवरात्रि का उपवास करते है| उन्हें अपनी सभी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ निश्चित रूप से करना चाहिए|
इसके अलावा यह भी माना जाता है कि दुर्गा चालीसा का जाप व्यक्ति के भीतर अध्यात्मिक तथा भावनात्मक दृष्टिकोण को जागृत करने में सहायता करता है|
दुर्गा चालीसा का पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है तथा मन में चल रहे अनावश्यक विचारों से भी मुक्ति दिलाता है|
ऐसा भी कहा जाता है कि दुर्गा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के अन्दर सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है एवं बुरी शक्तियों से लड़ने के लिए ताकत मिलती है|
दुर्गा चालीसा का पाठ भक्तों को सभी प्रकार की परेशानियों से बचाता है| अब हम आपको 99Pandit के बारे में जानकारी देंगे|
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|| दुर्गा चालीसा ||
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥
तुम संसार शक्ति लै कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥
रूप सरस्वती को तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥
मातंगी अरु धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै ।
जाको देख काल डर भाजै ॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजे नरनारी ॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावैं ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
शंकर आचारज तप अति कीनो ।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥
शक्ति रूप का मरम न पायो ।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥
आशा तृष्णा निपट सतावें ।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धि सिद्धि दै करहु निहाला ॥
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥
देवीदास शरण निज जानी ।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
|| दोहा ||
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे निशंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा ॥

|| Durga Chalisa ||
Namo Namo Durge Sukh Karni |
Namo Namo Ambe Dukh Harni ||
NIrankar Hai Jyoti Tumhari |
Tihun Lok Feli Ujiyari ||
Shashi Lalaat Mukh Maha Vishala |
Netra Lal Bhrikutee Vikrala ||
Roop Maatu Ko Adhik Suhaave |
Darshan Karat Jan Ati Sukh Paave ||
Tum Sansar Shakti Lai Keena |
Palan Hetu Anna Dhan Deena ||
Annapoorna Hui Jag Pala |
Tumhi Aadi Sundari Bala ||
Pralaykaal Sab Naashan Haari |
Tum Gauri Shiv Shankar Pyari ||
Shiv Yogi Tumhre Gun Gaavein |
Brahma Vishnu Tumhein Nit Dhyavein ||
Roop Saraswati Ko Tum Dhara |
De Subuddhi Rishi Munin Ubara ||
Dharyo Roop Narsingha Ko Amba |
Pragat Bhayi Phaad Kar Khamba ||
Raksha Kari Prahlaad Bachayo |
Hiranyaksha ko Swarg Pathayo ||
Laksmi Roop Dharo Jag Mahin |
Shree Narayan Anga Samahin ||
Ksheer Sindhu Mein Karat Vilasa |
Daya Sindhu Dije Man Aasa ||
Hingalaj Mein Tum Hi Bhawani |
Mahima Amit Na Jaat Bakhani ||
Matangi Aru Dhoomawati Mata |
Bhuvneshwari Bagala Sukhdata
Shree Bhairav Tara Jag Tarani |
Chhinna Bhala Bhava Dukh Nivarini ||
Kehri Vahan Soha Bhavani |
Laangur Veer Chalata Agavani ||
Kar Mein Khappar Khadaga Virajay |
Jako Dekh Kaal Dar Bhajey ||
Sohe Astra Aur Trishula |
Jaate Uthat Shatru Hiya Shoola ||
Nagarkot Mein Tumhi Virajat |
Tihun Lok Mein Danka Baajat ||
Shumbh – Nishumbh Daanv Tum Maare |
Rakta Beej Shankhan Sanhaare ||
Mahishasur Nrip Ati Abhimaani |
Jehi Agh Bhar Mahi Akulaani ||
Roop Karaal Kalika Dhara |
Sen Sahita Tum Tihin Sanhara ||
Pari Gaadh Santan Par Jab Jab |
Bhayi Sahay Matu Tum Tab Tab ||
Amarpuri Aru Baasav Lokaa |
Tab Mahima Sab Rahe Ashoka ||
Jwala Mein Hai Jyoti Tumhari |
Tumhein Sada Poojey Nar Nari ||
Prem Bhakti Se Jo Yash Gaave |
Dukh Daaridra Nikat Nahin Aave ||
Dhyaave Tumhein Jo Nar Man Layi |
Janma Maran Tako Chhouti Jaayi ||
Jogi Sur Muni Kahat Pukaari |
Yog Na Hoye Bina Shakti Tumhari ||
Shankar Aacharaj Tap Ati Keenho |
Kaam Aru Krodh Jeeti Sab Leenho ||
Nishidin Dhayn Dharo Shankar Ko |
Kahu Kaal Nahin Sumiron Tumko ||
Shakti Roop Ka Maram Na Payo |
Shakti Gayi Tab Man Pachitayo ||
Sharnagat Huyi Kirti Bakhani |
Jai Jai Jai Jagdamb Bhavani ||
Bhayi Prasann Aadi Jagadamba |
Dayi Shakti Nahin Keen Vilamba ||
Mauko Maatu Kashta Ati Ghero |
Tum Bin Kaun Harey Dukh Mero ||
Asha Trishna Nipat Satavein |
Moh Madadik Sab Binshaave ||
Shatru Nash Kijey Maharani |
Sumiron Ikchit Tumhein Bhavani ||
Karo Kripa Hey Maatu Dayala |
Riddhi Siddhi Dey Karahou Nihaala ||
Jab Lagi Jiyoun Daya Phal Paoun |
Tumhro Yash Mein Sada Sunaoun ||
Shree Durga Chalisa Jo Koi Gaave |
Sab Sukh Bhog Parampad Pave ||
Devidas Sharan Nij Jaani |
Kahun Kripa Jagadamb Bhavani ||
|| Doha ||
Sharanaagat Raksha Kare,
Bhakt Rahe Nishank ।
Main Aaya Teri Sharan Me,
Maatu Lijiye Ank ॥
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