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Parvati Chalisa in Hindi: पार्वती चालीसा पाठ

99Pandit Ji
Last Updated:March 14, 2024

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पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa) का पाठ माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| नवरात्रि के पांचवे दिन माता पार्वती के निमित्त उपवास तथा उनकी पूजा भी की जाती है| पौराणिक ग्रंथों में माता पार्वती को स्कंदमाता के नाम से भी जाना जाता है| इस दिन माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ माँ पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa) का जाप करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है|

माना जाता है कि जो भी व्यक्ति नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा तथा पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa) का पाठ करता है, उस व्यक्ति पर माता पार्वती के साथ भगवान शिव की भी अपार कृपा बरसती है| भगवान शिव तथा माता पार्वती की कृपा से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है तथा उसके घर में सुख समृद्धि प्राप्त होती है|

पार्वती चालीसा

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माँ पार्वती चालीसा पाठ हिंदी में | Parvati Chalisa Lyrics in Hindi

|| पार्वती चालीसा ||

|| दोहा ||

जय गिरी तनये दक्षजे
शम्भू प्रिये गुणखानि ।
गणपति जननी पार्वती
अम्बे! शक्ति! भवानि ॥

|| चालीसा ||

ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे ।
पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥

षड्मुख कहि न सकत यश तेरो ।
सहसबदन श्रम करत घनेरो ॥

तेऊ पार न पावत माता ।
स्थित रक्षा लय हिय सजाता ॥

अधर प्रवाल सदृश अरुणारे ।
अति कमनीय नयन कजरारे ॥

ललित ललाट विलेपित केशर ।
कुंकुंम अक्षत शोभा मनहर ॥

कनक बसन कंचुकि सजाए ।
कटी मेखला दिव्य लहराए ॥

कंठ मदार हार की शोभा ।
जाहि देखि सहजहि मन लोभा ॥

बालारुण अनंत छबि धारी ।
आभूषण की शोभा प्यारी ॥

नाना रत्न जड़ित सिंहासन ।
तापर राजति हरि चतुरानन ॥

इन्द्रादिक परिवार पूजित ।
जग मृग नाग यक्ष रव कूजित ॥
गिर कैलास निवासिनी जय जय ।
कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय ॥

त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी ।
अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ॥

हैं महेश प्राणेश तुम्हारे ।
त्रिभुवन के जो नित रखवारे ॥

उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब ।
सुकृत पुरातन उदित भए तब ॥

बूढ़ा बैल सवारी जिनकी ।
महिमा का गावे कोउ तिनकी ॥

सदा श्मशान बिहारी शंकर ।
आभूषण हैं भुजंग भयंकर ॥

कण्ठ हलाहल को छबि छायी ।
नीलकण्ठ की पदवी पायी ॥

देव मगन के हित अस किन्हो ।
विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो ॥

ताकी तुम पत्नी छवि धारिणी ।
दुरित विदारिणी मंगल कारिणी ॥

देखि परम सौंदर्य तिहारो ।
त्रिभुवन चकित बनावन हारो ॥

भय भीता सो माता गंगा ।
लज्जा मय है सलिल तरंगा ॥

सौत समान शम्भू पहआयी ।
विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ॥

तेहि कों कमल बदन मुरझायो ।
लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो ॥

नित्यानंद करी बरदायिनी ।
अभय भक्त कर नित अनपायिनी ॥

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी ।
माहेश्वरी हिमालय नन्दिनी ॥

काशी पुरी सदा मन भायी ।
सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ॥

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री ।
कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ॥

रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे ।
वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ॥

गौरी उमा शंकरी काली ।
अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ॥

सब जन की ईश्वरी भगवती ।
पतिप्राणा परमेश्वरी सती ॥

तुमने कठिन तपस्या कीनी ।
नारद सों जब शिक्षा लीनी ॥

अन्न न नीर न वायु अहारा ।
अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा ॥

पत्र घास को खाद्य न भायउ ।
उमा नाम तब तुमने पायउ ॥

तप बिलोकी ऋषि सात पधारे ।
लगे डिगावन डिगी न हारे ॥

तब तब जय जय जय उच्चारेउ ।
सप्तऋषि निज गेह सिद्धारेउ ॥

सुर विधि विष्णु पास तब आए ।
वर देने के वचन सुनाए ॥

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों ।
चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ॥

एवमस्तु कही ते दोऊ गए ।
सुफल मनोरथ तुमने लए ॥

करि विवाह शिव सों भामा ।
पुनः कहाई हर की बामा ॥

जो पढ़िहै जन यह चालीसा ।
धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ॥

|| दोहा ||

कूटि चंद्रिका सुभग शिर,
जयति जयति सुख खा‍नि
पार्वती निज भक्त हित,
रहहु सदा वरदानि ।

॥ इति श्री पार्वती चालीसा ॥

पार्वती चालीसा

Parvati Chalisa Lyrics in English | ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे

|| Parvati Chalisa ||

|| Doha ||

Jai giri tanaye dakshaje,
Shambhu priye gunakhaani.
Ganpati janani Parvati,
Ambe! Shakti! Bhavani.

|| Chalisa ||

Brahma bhed na tumharo paave,
Panch badan nit tumko dhyaave.

Shadmukh kahi na sakat yash tero,
Sahasbadan shram karat ghanero.

Teeru paar na paavat maata,
Sthit raksha lay hiya sajaata.

Adhar praval sadrish arunaare,
Ati kamniya nayan kajraare.

Lalit Lalat vilepit Keshar,
Kumkum Akshat shobha manahar.

Kanak basan kanchuki sajaaye,
Kati mekhla divya lahraaye.

Kanth madaar haar ki shobha,
Jaahi dekhi sahajahi man lobha.

Baalarun anant chhabi dhaari,
Aabhooshan ki shobha pyaari.

Nana ratna jadit sinhaasan,
Taapar rajati hari chaturanan.

Indraadik parivaar poojit,
Jag mrig naag yaksh rav koojit.

Gir Kailaas nivaasini jai jai,
Kotik prabha vikaasini jai jai.

Tribhuvan sakal kutumb tihaari,
Anu anu maham tumhaari ujiyaari.

Hain Mahesh praanesh tumhaare,
Tribhuvan ke jo nit rakhwaare.

Unaso pati tum praapt keenh jab,
Sukrit puratan udit bhae tab.

Boodha bail sawaari jinki,
Mahima ka gaave kou tinki.

Sadaa shmashaan bihaari Shankar,
Aabhooshan hain bhujang bhayankar.

Kanth Halaahal ko Chhavi Chhaayi,
Neelkanth ki padvi paayi.

Dev magn ke hit as kinho,
Vish lai aapu tinhi ami dinho.

Taaki tum patni chhavi dhaarin,
Durit vidaarin mangal kaarin.

Dekhi param saundarya tihaaro,
Tribhuvan chakit banaavan haaro.

Bhay bhita so maata Ganga,
Lajja may hai salil taranga.

Saut saman Shambhu pahaayi,
Vishnu padaabj chhodi so dhaayi.

Tehein komal badan murjhaayo,
Lakhi Satwar Shiv sheesh Chadhayo.

Nityanand kari bardaayini,
Abhay bhakt kar nit anapaayini.

Akhil paap trayatap nikandini,
Maaheshwari Himalay nandini.

Kaashi puri sadaa man bhaayi,
Siddh peeth tehi aap banaayi.

Bhagwati pratidin bhiksha daatri,
Kripa pramod sneh vidhaatri.

Ripukshay kaarini jai jai Ambe,
Vaacha siddh kari avalambe.

Gauri Uma Shankari Kaali,
Annapurna jag pratipali.

Sab Jan ki Ishwari Bhagwati,
Patiprana Parmeshwari Sati.

Tumne kathin tapasya kini,
Narad so jabb shiksha leeni.

Ann na neer na vaayu ahaara,
Asthi maatrat tan bhayau tumhaara.

Patra ghaas ko khadya na bhayau,
Uma naam tab tumne paayau.

Tap biloki rishi saath padhaare,
Lage digavaan digi na haare.

Tab tab jai jai jai ucharaayo,
Saptarishi nij geh siddhaaraayo.

Sur vidhi Vishnu paas tab aaye,
Var dene ke vachan sunaaye.

Maange Uma var pati tum tinaso,
Chaahat jag tribhuvan nidhi jinaso.

Evamastu kahi te doo gaye,
Sufal Manorath Tumne laaye.

Kari vivaah Shiv so bhaama,
Punah kahai Hari ki baama.

Jo padh hai jan yah chaalisa,
Dhan jan sukh deihai tehi eesa.

|| Doha ||

Kooti chandrika subhag shir,
Jayati jayati sukh khaani.
Parvati nij bhakt hit,
Rahahu sadaa vardani.

|| Iti Shri Parvati Chalisa ||

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