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Holi Geet Lyrics: होली के सबसे लोकप्रिय गीत हिंदी में

99PanditJi
Written By 99PanditJi
Last Updated February 5, 2026
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होली रंगों के साथ-साथ भक्ति और परंपरा का भी त्योहार है। ढोलक की थाप और पारंपरिक फाग के बिना यह अधूरा लगता है। क्या आप इस बार देसी अंदाज़ में होली मनाना चाहते हैं?

अक्सर हम पुराने लोकगीतों और भजनों के बोल भूल जाते हैं। 99Pandit आपकी यह मुश्किल आसान कर रहा है। हम लाए हैं सबसे लोकप्रिय पारंपरिक Holi Geet Lyrics का संग्रह।

यहाँ आपको ब्रज की होली, फाग और भक्ति गीत मिलेंगे। ये सभी लिरिक्स हिंदी में हैं और पढ़ने में बहुत सरल हैं। अब बोल खोजने की चिंता छोड़ें।

बस यह लिस्ट देखें और अपनों के साथ गाएं। तो चलिए, इन गीतों के रंगों में रंगते हैं। इन गीतों के साथ अपनी होली को यादगार बनाते हैं।

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रंग मत डारे रे सावरियां (Rang mat daare re saawariyaan) – Holi Geet Lyrics

रंग मत डारे रे सांवरिया,
मारो गुर्जर मारे रे,
रंग मत डारे रे….

में गुर्जरी नादान,
यो गुर्जर मतवालों रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डारे….

होली खेले तो काना,
बरसाने में आज्ये रे,
राधा और रूकमण ने,
सागे लेतो आज्ये रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डारे….

घर मत आज्ये रे काना,
सास बुरी छे,
नंदुली नादान माने,
बोलिया मारे रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डारे…..

सास बुरी छे मारी,
ननंद हठीली,
परनियो बेईमान,
माने नित मारे रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डारे….

चंद्र सखी भज बाल,
कृष्ण छवि,
हरी चरना में,
मारो चीत छे रे,
रंग मत डारे रे,
रंग मत डारे….

आज बृज में होली रे रसिया (Aaj brij mein holi rasiya) – Holi Geet Lyrics in Hindi

आज बृज में होली रे रसिया।
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥

अपने अपने घर से निकसी,
कोई श्यामल कोई गोरी रे रसिया।

कौन गावं केकुंवर कन्हिया,
कौन गावं राधा गोरी रे रसिया।

नन्द गावं के कुंवर कन्हिया,
बरसाने की राधा गोरी रे रसिया।

कौन वरण के कुंवर कन्हिया,
कौन वरण राधा गोरी रे रसिया।

श्याम वरण के कुंवर कन्हिया प्यारे,
गौर वरण राधा गोरी रे रसिया।

इत ते आए कुंवर कन्हिया,
उत ते राधा गोरी रे रसिया।

कौन के हाथ कनक पिचकारी,
कौन के हाथ कमोरी रे रसिया।

कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी,
राधा के हाथ कमोरी रे रसिया।

उडत गुलाल लाल भए बादल,
मारत भर भर झोरी रे रसिया।

अबीर गुलाल के बादल छाए,
धूम मचाई रे सब मिल सखिया।

चन्द्र सखी भज बाल कृष्ण छवि,
चिर जीवो यह जोड़ी रे रसिया।

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होली खेल रहे बाँके बिहारी (Holi khel rahe banke bihari) – Holi Geet Lyrics

होली खेल रहे बांकेबिहारी
आज रंग बरस रहा।
और झूम रही दुनिया सारी,
आज रंग बरस रहा॥

अबीर गुलाल के बादल छा रहे है।
होरी है होरी है छोर मचा रहे।
झोली भर के गुलाल कि मारी,
आज रंग बरस रहा॥

देख देख सखियन के मन हर्षा रहे।
मेरे बांके बिहारी
आज प्रेम बरसा रहे।
उनके संग में हैं राधा प्यारी,
आज रंग बरस रहा॥

आज नंदलाला ने धूम मचाई है।
प्रेम भरी होली कि झलक दिखायी है।
रंग भर भर के मारी पिचकारी,
आज रंग बरस रहा॥

अबीर गुलाल और ठसो का रंग है।
वृंदावन बरसानो झूम रह्यो संग है।
मैं बार बार जाऊं बलिहारी॥

होली खेले रघुवीरा अवध में (Holi khele raghuveera avadh mein) – Holi Geet Lyrics

होली खेले रघुवीरा अवध मा,
होली खेले रघुवीरा,
होली खेले रघुवीरा, होली खेले रघुवीरा,
होली खेले रघुवीरा अवध मा,
होली खेले रघुवीरा………….

किनका के हाथ कनक पिचकारी,
किनका के हाथ अबीर झोली
मोहे होली में कर दियो लाल रे,
ऐसो चटक रंग डारो,
ऐसो चटक रंग डारो, ऐसो चटक रंग डारो,
ऐसो चटक रंग डारो, अवध मा………..

होली खेले रघुवीरा,
राम के हाथ कनक पिचकारी,
सीता हाथ अबीर झोली,
रंग डारो, रंग डारो,
रंग डारो श्याम खेले होली, रंग डारो,
गोविंदा आला रे आला,
जरा रंग तो ना डाल नंदलाला……..

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कानुड़ो रंग डार गयो (Kanudo Rang Daar Gayo) – Holi Geet Lyrics

कानूडो रंग डार गयो मैं की करू
सांवरो रंग डार गयो मैं की करू
मैं की करू मैं की करू
कानूडो.. कानूडो रंग डार गयो मैं की करू

बंसी बाज़वे म्हारो श्याम सांवरो
जल जमुना के तीर
बंसी सुन मैं दोडी आउ
मंनडो डार ना दीर
मनडे में यो ही बसगयो मैं की करू
कानूडो रंग डार गयो मैं की करू

कदम की चिया रास रचिया
रार करत मुस भारी
हाथ पॅकडर यू जर जोबाट
निरख़्त सूरत हमारी
मैं गोरी बरसाने की गोरी
नटखट श्याम बिहारी
बंसी की धुन म्हारो चित हरलियो
भूली सुध बुध सारी
मुरली से मनडो हरलियो मैं की करू
कानूडो रंग डार गयो मैं की करू

ग्वाल ग्वाल संग होली खेलत
ले रंग लाल गुलाल
भर भर रंग पिचकारी मारे
यो नन्दजी को लाल
अपने ही रंग मैं रंगगयो मैं की करू
कानूडो रंग डार गयो मैं की करू

कानूडो रंग डार गयो मैं की करू
सांवरो रंग डार गयो मैं की करू
मैं की करू मैं की करू
कानूडो.. कानूडो रंग डार गयो मैं की करू

पारंपरिक होली गीत लिरिक्स का महत्व (Importance of Holi Geet Lyrics)

होली का त्योहार केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि सुरों और शब्दों का एक उत्सव है। Holi Geet Lyrics इस उत्सव की आत्मा होते हैं। इन गीतों के बोलों में हमारी लोक-संस्कृति, इतिहास और भक्ति का गहरा संगम छिपा होता है।

जब ढोलक की थाप के साथ ये शब्द गूँजते हैं, तो पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। Holi Geet Lyrics का असली महत्व इन बातों में निहित है:

  • सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: ये पारंपरिक बोल पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। ये हमें बताते हैं कि हमारे पूर्वज किस प्रकार प्रकृति और त्योहारों का आनंद लेते थे। इन बोलों को गाकर हम अपनी लुप्त होती लोक-कलाओं को जीवित रखते हैं।
  • भावों की अभिव्यक्ति: होली के गीतों के बोल मानवीय भावनाओं को बहुत ही सुंदरता से व्यक्त करते हैं। जहाँ ब्रज के गीतों में राधा-कृष्ण का प्रेम और नोक-झोंक है, वहीं अवध के गीतों में मर्यादा पुरुषोत्तम राम की शालीनता झलकती है।
  • सामाजिक समरसता: “गिले-शिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं” जैसे बोल समाज में भाईचारे का संदेश देते हैं। ये शब्द इंसान को नफरत छोड़कर प्रेम के रंग में रंगने की प्रेरणा देते हैं।
  • भक्ति और अध्यात्म: कई Holi Geet Lyrics हमें भगवान के करीब ले जाते हैं। फागुन के भजनों के बोल मन को शांति देते हैं और यह याद दिलाते हैं कि हर उत्सव के केंद्र में ईश्वर का प्रेम है।
  • सामूहिक आनंद: जब लोग एक साथ मिलकर इन बोलों को दोहराते हैं, तो एक सामूहिक एकता का भाव पैदा होता है। ये शब्द अजनबियों को भी एक-दूसरे का मित्र बना देते हैं।

संक्षेप में कहें तो, Holi Geet Lyrics के बिना फागुन का महीना फीका है। ये बोल ही हैं जो होली के रंगों को अर्थ देते हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।

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होली गीतों में वाद्य यंत्रों का जादू (Musical Instruments in Holi Songs)

पारंपरिक Holi Geet Lyrics का असली आनंद तभी आता है जब उनके साथ देसी वाद्य यंत्रों की थाप जुड़ती है। बिना साज-बाज के होली के शब्द अधूरे लगते हैं।

इन यंत्रों की गूँज ही हवा में फागुन की मस्ती घोलती है। होली के उत्सव में मुख्य रूप से इन वाद्य यंत्रों का जादू चलता है:

  • ढोलक और मंजीरा: उत्तर भारत और अवध की होली में ढोलक सबसे महत्वपूर्ण है। जब Holi Geet Lyrics की हर पंक्ति के अंत में ढोलक की ‘थाप’ और मंजीरे की ‘छनक’ गूँजती है, तो गायन का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है।
  • चंग (डफ): राजस्थान की होली ‘चंग’ के बिना अधूरी है। चंग की गहरी और गूँजती हुई आवाज सीधे दिल पर चोट करती है। शेखावाटी क्षेत्र में लोग हाथ में चंग लेकर गोल घेरे में नृत्य करते हुए पारंपरिक बोल गाते हैं।
  • बांसुरी: राधा-कृष्ण के भजनों और ब्रज के रसिया में बांसुरी की मधुर तान मिठास भर देती है। यह वाद्य यंत्र होली के गीतों को एक आध्यात्मिक और कोमल स्पर्श देता है।
  • नगाड़ा और ताशा: ग्रामीण इलाकों में बड़ी मंडलियों के साथ नगाड़े बजाए जाते हैं। इनकी तेज़ आवाज दूर-दूर तक सूचना देती है कि होली की टोली निकल चुकी है।

जब ये वाद्य यंत्र Holi Geet Lyrics के साथ ताल मिलाते हैं, तो सुनने वाला न केवल शब्दों के भावों को महसूस करता है, बल्कि खुद को नाचने से भी नहीं रोक पाता।

निष्कर्ष

होली केवल रंगों का खेल नहीं है। यह भावनाओं और सुरों का संगम है। इस ब्लॉग में दिए गए Holi Geet Lyrics हमारी पुरानी परंपराओं की धरोहर हैं।

इन गीतों में ब्रज की मिठास और राधा-कृष्ण का प्रेम झलकता है। इनमें अवध की मर्यादा और राजस्थान की खुशबू भी शामिल है। ये बोल हमें अपनी संस्कृति के गहरे अर्थ समझाते हैं।

आज के आधुनिक दौर में हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं। ऐसे में ये Holi Geet Lyrics हमें अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हैं। समूह में इन गीतों को गाने से मन को शांति मिलती है।

इससे आपसी रिश्तों की कड़वाहट मिटती है और भाईचारा बढ़ता है। 99Pandit का यह संग्रह इसी उद्देश्य से बनाया गया है।

आप अपने परिवार के साथ इन मधुर बोलों का आनंद ले सकें। इन गीतों का सार प्रेम के रंग में रंग जाना है। हमें उम्मीद है कि यह Holi Geet Lyrics संग्रह आपकी महफिल में जान डाल देगा।

यह आपकी होली को हमेशा के लिए यादगार बना देगा। 99Pandit की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Table Of Content

Frequently Asked Questions

होली के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक गीत कौन से हैं?

होली के सबसे प्रसिद्ध गीतों में "आज बिरज में होली रे रसिया", "होली खेलें रघुवीरा" और "रंग बरसे" शामिल हैं। ये गीत दशकों से होली के उत्सव की पहचान बने हुए हैं।

ब्रज की होली के गीतों (Holi Geet Lyrics) की क्या विशेषता है?

ब्रज की होली के गीतों में मुख्य रूप से भगवान कृष्ण और राधा रानी के प्रेम, शरारत और गोपियों के साथ उनकी ठिठोली का वर्णन होता है। इन गीतों में 'भक्ति' और 'श्रृंगार' रस का अद्भुत मेल मिलता है।

राजस्थानी फागण गीत किस वाद्य यंत्र के साथ गाए जाते हैं?

राजस्थान में होली के लोकगीत (फागण) मुख्य रूप से 'चंग' या 'डफ' की थाप पर गाए जाते हैं। इसके साथ ढोलक और मंजीरे का प्रयोग भी काफी लोकप्रिय है।

99Pandit पर उपलब्ध Holi Geet Lyrics का क्या लाभ है?

अक्सर लोग पुराने गीतों के बोल भूल जाते हैं। 99Pandit ने सभी लोकप्रिय और पारंपरिक Holi Geet Lyrics को एक ही जगह संकलित किया है, ताकि आप बिना किसी रुकावट के अपनी होली की मंडली में गा सकें।

क्या ये होली गीत पूजा या भजन संध्या में गाए जा सकते हैं?

जी हाँ, इस संग्रह में राधा-कृष्ण के बहुत ही सुंदर भजन शामिल हैं। "होली खेल रहे बांके बिहारी" जैसे गीत मंदिरों और घर की भजन संध्याओं के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।


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