Aja Ekadashi 2026: Date, Parana Time, Katha & Significance
The most sacred Ekadashi is coming in September. Aja Ekadashi 2026 will be commemorated on Monday, September 7, 2026. Following…
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नवरात्रि के इस पावन त्यौहार में दुर्गा अष्टमी 2026 [Durga Ashtami 2026] की पूजा तथा व्रत का बहुत ही बड़ा महत्व बताया गया है| इस वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का त्यौहार 11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 19 अक्टूबर तक समाप्त हो जाएगी तथा इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।
जिस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध करके असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी| इस पावन नवरात्रि के त्यौहार के मध्य में आने वाली अष्टमी तिथि को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|

महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी का त्यौहार देवी दुर्गा माँ को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन सभी महिलाएं उपवास रखती है तथा दुर्गा माता की पूजा करती है|
दुर्गा अष्टमी का यह दिन दुर्गा माता की आठवीं शक्ति महागौरी को अर्पित किया गया है| इस कारण शारदीय नवरात्रि 2026 की अष्टमी तिथि को देवी महागौरी का पूजन किया जाता है|
मान्यता है कि देवी दुर्गा महाष्टमी तिथि पर ही असुरों का संहार करने के लिए प्रकट हुई थी| इसके अलावा दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है|
तो आइये आपको इस लेख के माध्यम से बताते है कि दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि का हिन्दू धर्म में इतना महत्व क्यों है|
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महाष्टमी 2026 / दुर्गा अष्टमी 2026 तिथि:
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि 19 अक्टूबर 2026, सोमवार के दिन रहेगी।
अष्टमी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर 2026 को 08:14 PM से
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2026 को 06:05 PM तक
हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन माता चंड-मुंड ने राक्षस का संहार किया था|
इस कारण से इस दुर्गा अष्टमी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है| इस तिथि को हथियारों की पूजा की जाती है|
इस वजह से इस तिथि को वीर अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| महाष्टमी के त्यौहार को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|
दुर्गा अष्टमी की तिथि नवरात्रि पूजा के महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है| इस दिन माँ दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जाती है|
माँ गौरी भगवान शिव की पत्नी तथा भगवान गणेश जी की माता है| सबसे पहले भगवान श्री राम ने समुन्द्र के किनारे नौ दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा की थी|
इसके पश्चात ही उन्होंने युद्ध के लिए लंका की ओर प्रस्थान किया था| जिसके पश्चात उन्होंने रावण के खिलाफ युद्ध किया तथा उस पर विजय प्राप्त कर ली|
इस कारण से नवरात्रि पूर्ण होने अगले दिन यानि दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है| माना जाता है कि दुर्गा माँ नवरात्रि के समय कैलाश पर्वत को छोड़कर धरती पर आकर रहती है|
दुर्गा अष्टमी वह दिन है जब जब नवरात्रि का त्यौहार अंतिम चरण पर होता है| इस दिन हिन्दू धर्म में माता रानी के भक्तों के द्वारा छोटी कन्याओं को भोजन करवाया जाता है|
हिन्दू धर्म में दुर्गा अष्टमी तिथि का बहुत ही विशिष्ट महत्व बताया गया है| नवरात्रि की इस दुर्गा अष्टमी तिथि के दिन माता भवानी का जन्म हुआ था| माता भवानी एक बहुत ही महानतम शक्ति है|
इस वजह से दुर्गा अष्टमी की तिथि को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन महिलाएं कन्याओं का पूजन करके अपना उपवास खोलती है|
इस तिथि के दिन कुछ माता दुर्गा के भक्त कन्याओं को भोजन करवाते है तथा उनकी पूजा करते है| माना जाता है कि इस 2 साल से 10 साल तक बच्चियों को भोजन कराने तथा उनकी पूजा करने से आपको देवी माता की कृपा प्राप्त होती है|
इस शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| इस दिन माँ दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जा सकती है|
हिन्दू धर्म के अनुसार माना जाता है कि महागौरी का रूप घर में धन तथा एक बेहतरीन जीवनशैली लाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन कई महिलाएं उपवास रखती है|

कुछ लोग जो पुरे नौ दिन का उपवास नहीं रखते है| उन्हें अष्टमी तिथि का व्रत निश्चित रूप से रखना चाहिए| माना जाता है कि दुर्गा अष्टमी का व्रत लोगो के भाग्य में एक बहुत ही बड़ा बदलाव लाता है|
कुछ लोग अपनी सभी प्रकार की चिंताओं को दूर करने के लिए दुर्गा अष्टमी की तिथि का उपवास रखते तथा देवी दुर्गा की पूजा करते है| दुर्गा अष्टमी का त्यौहार घर तथा माता के पंडालो के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है|
किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|
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हालांकि, किसी भी समय भगवान की पूजा करना आपको कठिनाइयों, समस्याओं, तनाव और नकारात्मक ऊर्जाओं से हमें बचाता है। जैसा कि आज आपने इस लेख के माध्यम से दुर्गा अष्टमी 2026 के महत्व तथा पूजा की विधि के बारे में जाना|
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