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कामिका एकादशी 2026: तिथि, व्रत कथा, महत्व एवं दान

Bhumika Singh
Written ByBhumika Singh
Last UpdatedSeptember 12, 2026
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कामिका एकादशी 2026 (Kamika Ekadashi 2026) श्रावण मास में आती है। ये वो समय होता है जब मन भक्ति में भीगने लगता है। बारिश की तरह भावनाएँ भी बहने लगती हैं और उसी भाव में जब कोई सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है, तो उसका मन साफ़ हो जाता है।

आइये आज हम जानेंगे कामिका एकादशी 2026 की सही तिथि, इसकी व्रत कथा, धार्मिक महत्व और इससे जुड़ा दान-पुण्य कितना फलदायी होता है।

कामिका एकादशी 2026 तिथि व शुभ मुहूर्त – Kamika Ekadashi 2026 Date

यह कामिका एकादशी 2026 में 09 अगस्त, रविवार को मानी जाएगी। यह व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु की भक्ति के लिए बेहद पवित्र माना गया है।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ : 08 अगस्त 2026, शनिवार को 01:59 PM पर
  • एकादशी तिथि समाप्त : 09 अगस्त 2026, रविवार को 11:04 AM पर
  • पारण (व्रत खोलने का समय) : 10 अगस्त 2026 को सुबह 6 बजकर 18 मिनट से लेकर 08 बजकर 00 मिनट तक (पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करना शुभ माना जाता है)

चूँकि सूर्योदय के समय जो तिथि व्याप्त हो, व्रत उसी दिन रखा जाता है, इसलिए यह व्रत 09 अगस्त को ही रखा जाएगा। अपने शहर के लिए सटीक समय हेतु स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

कामिका एकादशी क्या है? – What is Kamika Ekadashi

कामिका एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाला एक पवित्र व्रत है।

यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे पापों से मुक्ति, मन की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना गया है।

कामिका एकादशी 2026

इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं, उपवास करते हैं, और पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान, मंत्र जाप, और पूजन करते हैं।

रात को जागरण किया जाता है और कथा-श्रवण का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, गौदान और तीर्थ यात्रा जितना फल मिलता है।

यह एकादशी न सिर्फ पापों को हरती है, बल्कि मन की इच्छाओं को भी पूरा करती है इसी वजह से इसे ‘कामिका’ (कामना पूरी करने वाली) कहा जाता है।

यह व्रत न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति के लिए भी बेहद फलदायी माना जाता है।

कामिका एकादशी व्रत कथा – Kamika Ekadashi Vrat Katha

एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, एक गाँव में एक आदमी रहता था, जो बहुत गुस्सैल था। एक दिन गुस्से में आकर उसने गलती से एक ब्राह्मण की हत्या कर दी।

तद्पश्चात उसका मन बेचैन रहने लगा। ना भूख लगती थी, ना नींद आती थी। लोग भी उसे बुरा मानने लगे। पछतावे में वो सब कुछ छोड़कर जंगल की ओर निकल गया, जहाँ उसे एक संत-महात्मा मिले।

वो उनके चरणों में गिर गया और बोला “मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया है महाराज, क्या मेरे लिए कोई रास्ता बचा है?” महात्मा मुस्कराए और बोले पछतावा सबसे पहला उपाय है।

अब तू श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष वाली एकादशी तिथि का व्रत रख, जिसका नाम है कामिका एकादशी, उस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर, व्रत कर और सच्चे मन से क्षमा माँग।”

वो आदमी गाँव लौटा और कामिका एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से किया। वो दिनभर भूखा रहा, भगवान विष्णु का नाम जपा और ब्राह्मण आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

कुछ ही दिनों में उसका जीवन बदल गया। मन हल्का हुआ, लोग भी फिर से जुड़ने लगे और उसे आत्मिक शांति मिलने लगी।

कहते हैं, जो भी व्यक्ति कामिका एकादशी का व्रत श्रद्धा से करता है, उसे न सिर्फ पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मन की शांति और मोक्ष का रास्ता भी खुल जाता है।

पद्म पुराण के उत्तर खंड में, भगवान श्रीकृष्ण स्वयं युधिष्ठिर को कामिका एकादशी की महिमा बताते हुए कहते हैं कि इस दिन तुलसी दल से भगवान विष्णु की पूजा करने से गंगा स्नान से भी अधिक पुण्य मिलता है।

कामिका एकादशी का व्रत क्यों करें?

कामिका एकादशी का व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन उपवास व पूजा करने से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।

इस व्रत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे करने से गंगा-स्नान, तीर्थ यात्रा, और दान-पुण्य के बराबर फल मिलता है। जो लोग मानसिक तनाव , डर, या पछतावे में जी रहे हों, उनके लिए ये व्रत बहुत राहत देने वाला होता है

कामिका एकादशी व्रत की विधि एवं पूजा सामग्री

व्रत की विधि (Vidhi) –

  1. व्रत से एक दिन पहले हल्का भोजन करें और मन में संकल्प लें।
  2. व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा की जगह तैयार करें।
  3. भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  4. गंगाजल से मूर्ति को स्नान कराएँ और पीले कपड़े से सजाएँ।
  5. फूल, चंदन, तुलसी, अक्षत, धूप-दीप से पूजा करें।
  6. विष्णु सहस्रनाम, श्री विष्णु चालीसा या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
  7. दिनभर उपवास रखें – निर्जल, फलाहार या सिर्फ जल पर रह सकते हैं, अपनी श्रद्धा अनुसार।
  8. रात को जागरण करें या भजन-कीर्तन करें।
  9. अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।
  10. पहले किसी ज़रूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन या वस्त्र दान दें, फिर खुद भोजन करें।

इस व्रत में सबसे ज़रूरी चीज़ है मन की श्रद्धा और शुद्ध भाव। चाहे सारी सामग्री न हो, लेकिन अगर दिल से भगवान को याद किया जाए, तो व्रत सफल माना जाता है।

सावधानी: निर्जल व्रत (बिना जल के उपवास) की परंपरा है, लेकिन बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को निर्जल व्रत रखने से पहले परिवार या डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। फलाहार व्रत भी उतना ही फलदायी माना जाता है।

व्रत में उपयोग होने वाली सामग्री (Samagri) –

  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर
  • पीला कपड़ा
  • फूल (विशेषकर पीले)
  • तुलसी के पत्ते
  • चावल (अक्षत)
  • दीपक, धूपबत्ती, कपूर
  • चंदन, रोली
  • गंगाजल
  • पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
  • पीले फल, पीली मिठाई
  • पूजा की थाली, कलश, जल पात्र, घंटी
  • साफ़ पीले या सफेद रंग के वस्त्र

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व – Importance of Kamika Ekadashi 2026

कहा जाता है कि इस एकादशी पर जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु का व्रत करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और उसे पापों से मुक्ति मिलती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का फल इतना शक्तिशाली होता है कि इसे गंगा स्नान, गौदान, और यज्ञ के बराबर पुण्य देने वाला बताया गया है

कामिका एकादशी 2026

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो अपने जीवन में अशांति, अपराधबोध या बुरे कर्मों से घिरे होते हैं। इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत गहरा है।

जब इंसान पूरे दिन व्रत रखकर भगवान का नाम जपता है, तो उसका मन शांत होता है, सोच सकारात्मक होती है और आत्मा को भीतर से हल्कापन महसूस होता है।

कामिका एकादशी के पुण्यदायक दान

  1. पीले कपड़े – भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत पसंद है। इसलिए इस दिन पीले कपड़ों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे श्री हरि की कृपा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  2. फल और मिठाई – इस दिन मौसमी फल और खासकर पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू) का दान कर सकते हैं। यह दरिद्रता दूर करता है और घर में अन्न-धन की बढ़ोतरी होती है।
  3. अनाज (अन्न दान) – चावल, दाल, गेहूं जैसे अनाज का दान करना बहुत बड़ा पुण्य माना जाता है खासकर चावल का दान इस दिन बहुत शुभ होता है। इससे घर में हमेशा भोजन की भरपूर उपलब्धता बनी रहती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदैव हमारे साथ रहता है।
  4. तिल का दान – कामिका एकादशी पर काले या सफेद तिल दान करना भी अच्छा माना गया है। ये दान पितरों की आत्मा की शांति के लिए होता है और पापों से मुक्ति भी मिलती है।
  5. घी और दही – घी और दही का दान करने से अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।
  6. धन और दक्षिणा – कोई भी चीज़ दान करें, उसके साथ थोड़ी सी दक्षिणा (कुछ पैसे) ज़रूर दें। इससे दान पूरा माना जाता है।

दान करते समय ध्यान रखने वाली बातें:

  1. दान सच्चे मन और अच्छे भाव से करें, दिखावे के लिए नहीं।
  2. कोशिश करें कि दान ब्राह्मण या ज़रूरतमंद इंसान को ही दें।
  3. सूर्यास्त के बाद दान ना करें, दिन में ही देना शुभ होता है।

कामिका एकादशी व्रत के लाभ

कामिका एकादशी का व्रत करने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है।

जो लोग मानसिक तनाव, पछतावे या किसी गलती का बोझ लेकर जी रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी राहत से कम नहीं।

कहते हैं कि कामिका एकादशी पर सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से पुराने पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस दिन का व्रत खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह मन की सच्ची कामनाएं पूरी करता है।

कामिका एकादशी 2026

जिस भी श्रद्धालु के मन में कोई इच्छा हो — चाहे नौकरी की, शादी की, संतान की या किसी भी प्रकार की वह इस व्रत के माध्यम से भगवान से सीधा जुड़ सकता है।

इस व्रत को करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है, आध्यात्मिक रूप से यह व्रत मोक्ष की ओर बढ़ने का एक मजबूत कदम माना जाता है, यानी आत्मा को शुद्धि और आगे के जन्मों से मुक्ति की संभावना भी बढ़ जाती है।

इसलिए कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक शुभ अवसर है।

निष्कर्ष

कामिका एकादशी 2026 सच्चे मन, थोड़ी श्रद्धा और अनुशासन से मनाया जाने वाला व्रत है, इसमें कोई बड़ा खर्च या जटिल विधि नहीं है। सही मुहूर्त पर व्रत रखना और विधिपूर्वक पूजा करना इसका सबसे ज़रूरी हिस्सा है।

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Frequently Asked Questions

कामिका एकादशी 2026 में कब है?

08 अगस्त 2026, शनिवार को 01:59 PM पर शुरू होगी और 09 अगस्त 2026, रविवार को 11:04 AM पर समाप्त होगी।

इस दिन हम क्या खा सकते है?

अगर आप उपवास कर रहे हैं तो फलाहार कर सकते हैं, जैसे फल, दूध, पानी, सूखा मेवा या साबूदाने की खिचड़ी। कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं, लेकिन ये आपकी श्रद्धा और सेहत पर निर्भर करता है।

क्या व्रत बिना पूजा के रखा जा सकता है?

सच्चे मन से भगवान का नाम लेना ही सबसे बड़ी पूजा है, अगर आप पूजा की विधि पूरी न कर सकें, तो भी व्रत किया जा सकता है बस मन साफ और भाव सच्चे हों।

इस दिन दान ज़रूरी है क्या?

हाँ, अगर आप कर सकें तो ज़रूर करें। खासकर पीले वस्त्र, फल, चावल, तिल और घी का दान शुभ माना गया है। साथ में थोड़ी सी दक्षिणा देना भी अच्छा होता है।

क्या कोई भी व्यक्ति ये व्रत रख सकता है?

हाँ, कोई भी रख सकता है चाहे स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या वृद्ध। बस मन में श्रद्धा होनी चाहिए। शारीरिक रूप से अस्वस्थ हों तो फलाहार या मानसिक उपवास भी किया जा सकता है।


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