FestivalsShani Jayanti 2026: Date, Timings, Puja Rituals & Significance
Shani Jayanti 2026 is the celebration of Lord Shani’s birthday. Shani Jayanti is the birth anniversary of Lord…
calendar_today May 15, 2026
कामिका एकादशी 2026 (Kamika Ekadashi 2026) श्रावण मास में आती है। ये वो समय होता है जब मन भक्ति में भीगने लगता है। बारिश की तरह भावनाएँ भी बहने लगती हैं और उसी भाव में जब कोई सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करता है, तो उसका मन साफ़ हो जाता है।
आइये आज हम जानेंगे कामिका एकादशी 2026 की सही तिथि, इसकी व्रत कथा, धार्मिक महत्व और इससे जुड़ा दान-पुण्य कितना फलदायी होता है।
यह कामिका एकादशी 2026 में 09 अगस्त, रविवार को मानी जाएगी। यह व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु की भक्ति के लिए बेहद पवित्र माना गया है।
चूँकि सूर्योदय के समय जो तिथि व्याप्त हो, व्रत उसी दिन रखा जाता है, इसलिए यह व्रत 09 अगस्त को ही रखा जाएगा। अपने शहर के लिए सटीक समय हेतु स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
कामिका एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाला एक पवित्र व्रत है।
यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे पापों से मुक्ति, मन की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना गया है।

इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं, उपवास करते हैं, और पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान, मंत्र जाप, और पूजन करते हैं।
रात को जागरण किया जाता है और कथा-श्रवण का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, गौदान और तीर्थ यात्रा जितना फल मिलता है।
यह एकादशी न सिर्फ पापों को हरती है, बल्कि मन की इच्छाओं को भी पूरा करती है इसी वजह से इसे ‘कामिका’ (कामना पूरी करने वाली) कहा जाता है।
यह व्रत न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति के लिए भी बेहद फलदायी माना जाता है।
एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, एक गाँव में एक आदमी रहता था, जो बहुत गुस्सैल था। एक दिन गुस्से में आकर उसने गलती से एक ब्राह्मण की हत्या कर दी।
तद्पश्चात उसका मन बेचैन रहने लगा। ना भूख लगती थी, ना नींद आती थी। लोग भी उसे बुरा मानने लगे। पछतावे में वो सब कुछ छोड़कर जंगल की ओर निकल गया, जहाँ उसे एक संत-महात्मा मिले।
वो उनके चरणों में गिर गया और बोला “मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया है महाराज, क्या मेरे लिए कोई रास्ता बचा है?” महात्मा मुस्कराए और बोले पछतावा सबसे पहला उपाय है।
अब तू श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष वाली एकादशी तिथि का व्रत रख, जिसका नाम है कामिका एकादशी, उस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर, व्रत कर और सच्चे मन से क्षमा माँग।”
वो आदमी गाँव लौटा और कामिका एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा से किया। वो दिनभर भूखा रहा, भगवान विष्णु का नाम जपा और ब्राह्मण आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
कुछ ही दिनों में उसका जीवन बदल गया। मन हल्का हुआ, लोग भी फिर से जुड़ने लगे और उसे आत्मिक शांति मिलने लगी।
कहते हैं, जो भी व्यक्ति कामिका एकादशी का व्रत श्रद्धा से करता है, उसे न सिर्फ पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मन की शांति और मोक्ष का रास्ता भी खुल जाता है।
पद्म पुराण के उत्तर खंड में, भगवान श्रीकृष्ण स्वयं युधिष्ठिर को कामिका एकादशी की महिमा बताते हुए कहते हैं कि इस दिन तुलसी दल से भगवान विष्णु की पूजा करने से गंगा स्नान से भी अधिक पुण्य मिलता है।
कामिका एकादशी का व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दिन उपवास व पूजा करने से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं, पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।
इस व्रत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे करने से गंगा-स्नान, तीर्थ यात्रा, और दान-पुण्य के बराबर फल मिलता है। जो लोग मानसिक तनाव , डर, या पछतावे में जी रहे हों, उनके लिए ये व्रत बहुत राहत देने वाला होता है।
व्रत की विधि (Vidhi) –
इस व्रत में सबसे ज़रूरी चीज़ है मन की श्रद्धा और शुद्ध भाव। चाहे सारी सामग्री न हो, लेकिन अगर दिल से भगवान को याद किया जाए, तो व्रत सफल माना जाता है।
सावधानी: निर्जल व्रत (बिना जल के उपवास) की परंपरा है, लेकिन बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को निर्जल व्रत रखने से पहले परिवार या डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। फलाहार व्रत भी उतना ही फलदायी माना जाता है।
व्रत में उपयोग होने वाली सामग्री (Samagri) –
कहा जाता है कि इस एकादशी पर जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु का व्रत करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और उसे पापों से मुक्ति मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का फल इतना शक्तिशाली होता है कि इसे गंगा स्नान, गौदान, और यज्ञ के बराबर पुण्य देने वाला बताया गया है।

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो अपने जीवन में अशांति, अपराधबोध या बुरे कर्मों से घिरे होते हैं। इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत गहरा है।
जब इंसान पूरे दिन व्रत रखकर भगवान का नाम जपता है, तो उसका मन शांत होता है, सोच सकारात्मक होती है और आत्मा को भीतर से हल्कापन महसूस होता है।
दान करते समय ध्यान रखने वाली बातें:
कामिका एकादशी का व्रत करने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि मन को शांति और आत्मा को सुकून मिलता है।
जो लोग मानसिक तनाव, पछतावे या किसी गलती का बोझ लेकर जी रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी राहत से कम नहीं।
कहते हैं कि कामिका एकादशी पर सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से पुराने पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस दिन का व्रत खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह मन की सच्ची कामनाएं पूरी करता है।

जिस भी श्रद्धालु के मन में कोई इच्छा हो — चाहे नौकरी की, शादी की, संतान की या किसी भी प्रकार की वह इस व्रत के माध्यम से भगवान से सीधा जुड़ सकता है।
इस व्रत को करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है, आध्यात्मिक रूप से यह व्रत मोक्ष की ओर बढ़ने का एक मजबूत कदम माना जाता है, यानी आत्मा को शुद्धि और आगे के जन्मों से मुक्ति की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसलिए कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक शुभ अवसर है।
कामिका एकादशी 2026 सच्चे मन, थोड़ी श्रद्धा और अनुशासन से मनाया जाने वाला व्रत है, इसमें कोई बड़ा खर्च या जटिल विधि नहीं है। सही मुहूर्त पर व्रत रखना और विधिपूर्वक पूजा करना इसका सबसे ज़रूरी हिस्सा है।
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08 अगस्त 2026, शनिवार को 01:59 PM पर शुरू होगी और 09 अगस्त 2026, रविवार को 11:04 AM पर समाप्त होगी।
अगर आप उपवास कर रहे हैं तो फलाहार कर सकते हैं, जैसे फल, दूध, पानी, सूखा मेवा या साबूदाने की खिचड़ी। कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं, लेकिन ये आपकी श्रद्धा और सेहत पर निर्भर करता है।
सच्चे मन से भगवान का नाम लेना ही सबसे बड़ी पूजा है, अगर आप पूजा की विधि पूरी न कर सकें, तो भी व्रत किया जा सकता है बस मन साफ और भाव सच्चे हों।
हाँ, अगर आप कर सकें तो ज़रूर करें। खासकर पीले वस्त्र, फल, चावल, तिल और घी का दान शुभ माना गया है। साथ में थोड़ी सी दक्षिणा देना भी अच्छा होता है।
हाँ, कोई भी रख सकता है चाहे स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या वृद्ध। बस मन में श्रद्धा होनी चाहिए। शारीरिक रूप से अस्वस्थ हों तो फलाहार या मानसिक उपवास भी किया जा सकता है।